₹2,929 करोड़ के बैंक फ्रॉड का मामला
नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 19 मार्च को उद्योगपति अनिल अंबानी(Anil Ambani) से दिल्ली स्थित मुख्यालय में लंबी पूछताछ की। यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा दर्ज कराई गई ₹2,929 करोड़ की धोखाधड़ी की शिकायत से जुड़ा है। CBI ने पिछले साल अनिल अंबानी और आरकॉम (RCom) के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और गबन की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। आरोप है कि बैंकों से लिए गए लोन के फंड का इस्तेमाल(Use) तय उद्देश्यों के बजाय अन्य जगहों पर किया गया, जिससे अकेले SBI को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
अनिल अंबानी का पक्ष: ‘मैनेजमेंट में शामिल नहीं था’
पूछताछ के दौरान अनिल अंबानी के पक्ष की ओर से यह दलील दी गई है कि यह मामला 10 साल से भी ज्यादा पुराना है। उनके प्रवक्ताओं का कहना है कि जिस कालखंड की जांच हो रही है, उस समय अनिल अंबानी(Anil Ambani) कंपनी में केवल ‘नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर’ की भूमिका में थे। उनका तर्क है कि वे कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज या लोन से जुड़े फैसलों में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे। अंबानी के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और 20 मार्च को भी पूछताछ के लिए उपस्थित रहेंगे।
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जांच का अगला चरण: ‘फंड ट्रेल’ की तलाश
CBI अब इस मामले में जुटाए गए डिजिटल दस्तावेजों और अनिल अंबानी(Anil Ambani) के बयानों का मिलान करेगी। जांच एजेंसी का मुख्य फोकस ‘फंड ट्रेल’ पर है, यानी यह पता लगाना कि बैंकों से लिया गया पैसा असल में किन खातों में ट्रांसफर किया गया और उसका अंतिम उपयोग क्या था। अनिल अंबानी ने खुद को ‘फ्रॉड’ घोषित करने के SBI के फैसले को पहले ही अदालत में चुनौती दे रखी है। इस पूछताछ के नतीजों का असर न केवल अनिल अंबानी की व्यक्तिगत कानूनी स्थिति पर पड़ेगा, बल्कि यह बैंकिंग सेक्टर के बड़े एनपीए (NPA) मामलों की जांच को भी नई दिशा दे सकता है।
अनिल अंबानी पर मुख्य रूप से किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है?
CBI ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy), धोखाधड़ी (Cheating) और (विश्वासघात) शामिल हैं। यह मामला मुख्य रूप से बैंक लोन के गबन और हेराफेरी के आरोपों पर आधारित है।
इस मामले में SBI के अलावा अन्य बैंकों की क्या स्थिति है?
रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) पर विभिन्न बैंकों का कुल बकाया ₹40,000 करोड़ से भी अधिक था। हालांकि, वर्तमान CBI जांच SBI की विशेष शिकायत पर केंद्रित है, जिसे अकेले ₹2,929 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। अन्य बैंकों के बकाये को लेकर भी दिवाला प्रक्रिया (Insolvency) और अन्य कानूनी कार्यवाहियां अलग से चल रही हैं।
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