Global Food Crisis: वैश्विक खाद्य संकट की आहट: 3 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं कीमतें

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक खाद्य मूल्य(Global Food Crisis) सूचकांक पिछले तीन वर्षों के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Route) के बंद होने से न केवल व्यापार बाधित हुआ है, बल्कि डीजल और फर्टिलाइजर (खाद) की आपूर्ति रुकने से कृषि लागत में भारी इजाफा हुआ है। यह स्थिति आने वाले समय में एक बड़े वैश्विक खाद्य संकट की ओर इशारा कर रही है

तेल और मीट की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी

अप्रैल महीने के आंकड़ों के मुताबिक, वेजिटेबल ऑयल (खाद्य तेल) की कीमतों में मार्च के मुकाबले 5.9% की भारी बढ़त देखी गई है, जो जुलाई 2022 के बाद का सबसे उच्च स्तर है। कच्चे तेल के महंगे होने से बायो-फ्यूल की मांग बढ़ी है, जिसका सीधा असर खाद्य तेलों पर पड़ा है। इसके साथ ही, मीट इंडेक्स ने अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और इसमें 1.2% की वृद्धि दर्ज की गई है। अनाज की कीमतों में भी उछाल आया है, क्योंकि किसान अब महंगी खाद के कारण गेहूं जैसी फसलों की बुआई कम करने पर विचार कर रहे हैं।

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भारत पर असर और भविष्य की चेतावनी

भारत में भी इसका असर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। ‘एसेंशियल कमोडिटी इंडेक्स’ के अनुसार, अप्रैल में जरूरी 20 में से 16 वस्तुओं की कीमतें 36% तक बढ़ गई हैं, जिससे रिटेल महंगाई 4% तक पहुंच गई है। FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध 90 दिनों से अधिक खिंचता है, तो 2026 के अंत तक दुनिया को ‘ग्लोबल फूड क्राइसिस’ का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में कंपनियां पुराना स्टॉक बेच रही हैं, लेकिन जैसे ही नया माल आएगा, उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ और बढ़ जाएगा।

खाद्य कीमतों में अचानक आई इस तेजी का मुख्य कारण क्या है?

इसका मुख्य कारण अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते हॉर्मुज रूट का बंद होना है। इससे ईंधन और खाद की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है और लॉजिस्टिक्स (परिवहन) में समस्या आ रही है।

‘ग्लोबल फूड क्राइसिस’ की चेतावनी क्यों दी जा रही है?

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, फिलहाल कंपनियां पुराना स्टॉक बेचकर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं। यदि युद्ध लंबा चलता है और खाद-ईंधन की ऊंची लागत उत्पादन चक्र में शामिल होती है, तो 2026 के अंत तक अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों की भारी कमी हो सकती है।

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Dhanarekha

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