भारत की अर्थव्यवस्था पर चौतरफा संकट
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के बीच बढ़ती जुबानी जंग ने वैश्विक तेल बाजार(Crude Oil) में भूचाल ला दिया है। ईरान द्वारा ग्लोबल सप्लाई ठप करने की धमकी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत $110.74 प्रति बैरल पर पहुंच गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का रास्ता बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं। हालांकि बाजार को संभालने के लिए OPEC+ देशों ने मई 2026 से उत्पादन में रोजाना 2.06 लाख बैरल की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है।
भारत के आयात बिल और रुपए पर भारी बोझ
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात(Crude Oil) करता है। ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमतों में मात्र $1 की बढ़त भी भारत के सालाना आयात बिल को ₹16,000 करोड़ तक बढ़ा देती है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ेगी, जिससे रुपया और कमजोर होगा। इसका सीधा असर यह होगा कि विदेश यात्रा, बाहर पढ़ाई करना और अन्य देशों से सामान मंगाना काफी खर्चीला हो जाएगा। साथ ही देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी बढ़ेगा।
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महंगाई की मार और आम जनता की जेब पर असर
कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में उछाल। केयरएज ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार, तेल की कीमतों में हर $10 की बढ़त भारत में रिटेल महंगाई को 0.60% तक बढ़ा सकती है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई (Transportation) महंगी हो जाती है, जिससे फल, सब्जी, दूध और अन्य रोजमर्रा के जरूरी सामानों के दाम अपने आप बढ़ जाते हैं।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ इतना महत्वपूर्ण क्यों है और इसके बंद होने से क्या होगा?
दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती है। यदि ईरान इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे कीमतें $150 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को छू सकती हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आम आदमी को क्या नुकसान है?
तेल महंगा होने से माल ढोने वाले वाहनों का किराया बढ़ जाता है। इससे फल, सब्जियां, राशन और प्लास्टिक से बनी हर जरूरी चीज महंगी हो जाती है। आसान शब्दों में कहें तो आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह बिगड़ जाता है।
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