FDI: FDI नियमों में बदलाव

By Dhanarekha | Updated: March 11, 2026 • 2:14 PM

पड़ोसी देशों से निवेश अब होगा आसान

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारत की सीमा से सटे देशों (जैसे चीन) से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में बड़ी ढील दी है। मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘प्रेस नोट 3’ के प्रावधानों में संशोधन(Amendment) को मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य निवेश की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है

10% हिस्सेदारी और ऑटोमैटिक रूट की सुविधा

नए नियमों के अनुसार, यदि किसी पड़ोसी देश के निवेशक की भारतीय कंपनी में हिस्सेदारी 10% से कम है और उसका कंपनी के प्रबंधन या फैसलों पर कोई नियंत्रण नहीं है, तो उसे अब सरकारी मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे प्रस्तावों को अब ऑटोमैटिक(Automatic) रूट से मंजूरी मिल जाएगी। हालांकि, संबंधित भारतीय कंपनी को इसकी जानकारी ‘उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग’ (DPIIT) को देनी होगी। इस कदम से विदेशी निवेश के प्रवाह में आने वाली प्रशासनिक अड़चनें काफी हद तक कम हो जाएंगी।

स्टार्टअप्स और डीप-टेक सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

सरकार के इस फैसले का सबसे सकारात्मक प्रभाव भारतीय स्टार्टअप्स और डीप-टेक(FDI) कंपनियों पर पड़ेगा। अब तक कई ग्लोबल वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स भारत में निवेश करने से हिचकिचा रहे थे क्योंकि उनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा शामिल होता था। अब ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा स्पष्ट होने से वैश्विक फंड्स के लिए भारत में पैसा लगाना आसान हो जाएगा। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है, जिससे निवेश प्रस्तावों पर जल्द फैसला लिया जा सकेगा।

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सुरक्षा और भारतीय नियंत्रण पर जोर

नियमों में ढील देने के बावजूद, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया है। संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों(FDI) में ‘फास्ट-ट्रैक’ मंजूरी तभी दी जाएगी जब कंपनी की अधिकांश शेयर-होल्डिंग और नियंत्रण भारतीय नागरिकों या कंपनियों के पास बना रहे। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल्स जैसे क्षेत्रों को इस नीति से सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है, जिससे भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।

‘प्रेस नोट 3’ में बदलाव से भारतीय स्टार्टअप्स को क्या फायदा होगा?

अब तक वैश्विक फंड्स में पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा होने पर भी सरकारी मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे निवेश में देरी होती थी। अब 10% से कम हिस्सेदारी पर मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, जिससे स्टार्टअप्स को फंड मिलना आसान और तेज हो जाएगा।

क्या इस ढील से देश की सुरक्षा को कोई खतरा हो सकता है?

नहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। रणनीतिक क्षेत्रों में फास्ट-ट्रैक अप्रूवल केवल उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जिनका नियंत्रण (Control) और मालिकाना हक भारतीय हाथों में रहेगा।

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