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Gold: सोना-चांदी ऐतिहासिक ऊंचाई पर

Dhanarekha
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Gold: सोना-चांदी ऐतिहासिक ऊंचाई पर

निवेश के सुरक्षित ठिकानों में जबरदस्त उबाल

नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में आज एक नया इतिहास(Gold) रचा गया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी की कीमत पहली बार ₹3 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर ₹3.05 लाख प्रति किलो के ऑलटाइम हाई(All Time High) पर पहुंच गई है। महज 20 दिनों में चांदी में ₹74 हजार से ज्यादा की तेजी देखी गई है। वहीं, सोना भी पीछे नहीं है; यह ₹2,429 की बढ़त के साथ ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू चुका है। यह उछाल निवेशकों के बढ़ते भरोसे और वैश्विक अस्थिरता का परिणाम है

कीमतों में आग लगने के मुख्य कारण

इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण वैश्विक और औद्योगिक कारण हैं। चांदी के मामले में इंडस्ट्रियल डिमांड (खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स) सबसे बड़ा कारक है, जहाँ चांदी अब केवल आभूषण(Gold) नहीं बल्कि एक अनिवार्य कच्चा माल बन गई है। वहीं सोने की कीमतों को कमजोर होते डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की संभावना और रूस-यूक्रेन जैसे भू-राजनीतिक तनाव से हवा मिल रही है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, विशेषकर चीन, भारी मात्रा में सोना जमा कर रहे हैं, जिससे सप्लाई के मुकाबले मांग कहीं अधिक बनी हुई है।

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भविष्य का अनुमान और विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी अभी रुकने वाली नहीं है। मोतीलाल ओसवाल और सैमको सिक्योरिटीज जैसे संस्थानों के अनुसार, 2026 में चांदी ₹3.20 लाख से ₹3.94 लाख प्रति किलो तक जा सकती है। वैश्विक निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी ने तो डॉलर की कमजोरी के चलते चांदी के $200 प्रति(Gold) औंस तक पहुंचने की संभावना जताई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार में आने वाली हर छोटी गिरावट खरीदारी का एक बेहतरीन अवसर हो सकती है, क्योंकि ग्रीन एनर्जी और सुरक्षित निवेश की मांग सोने-चांदी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

चांदी की कीमतों में अचानक इतनी बड़ी तेजी आने का सबसे बड़ा तकनीकी कारण क्या है?

चांदी की तेजी का सबसे बड़ा कारण इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी(Gold) का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ के डर से कंपनियां भविष्य की जरूरतों के लिए भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे बाजार में चांदी की किल्लत हो गई है और कीमतें बढ़ रही हैं।

क्या आम निवेशकों को इस ऊंचे स्तर पर सोना खरीदना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने में तेजी के पीछे वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जैसे ठोस कारण हैं। हालांकि कीमतें अपने ऑलटाइम हाई पर हैं, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोना अभी भी एक सुरक्षित निवेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि एक साथ बड़ी राशि निवेश करने के बजाय, कीमतों में होने वाली हर छोटी गिरावट (Dip) पर खरीदारी करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है।

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