Breaking News: Gold: भारतीय घरों का सोना बदल सकता अर्थव्यवस्था

By Dhanarekha | Updated: December 20, 2025 • 12:49 PM

छिपी संपत्ति से खुले विकास का रास्ता

नई दिल्ली: भारतीय घरों में जमा सोना(Gold) अब केवल पारंपरिक बचत नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है। मॉर्गन स्टेनली(Morgan Stanley) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारत(India) के घरों में लगभग 35,000 टन सोना(Gold) मौजूद है, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 5 ट्रिलियन डॉलर आंकी जा रही है। यह संपत्ति औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से बाहर है और अब तक निष्क्रिय पड़ी हुई है। सही नीति अपनाकर इसे राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाया जा सकता है।

साल 2000 से 2025 के बीच देश में आधिकारिक रूप से 700 टन से अधिक सोने का आयात हुआ है, जिसकी कीमत सैकड़ों अरब डॉलर है। इसमें अनौपचारिक आयात और यात्रियों द्वारा लाए गए आभूषण जोड़ दिए जाएं, तो वास्तविक आंकड़ा और भी बड़ा हो जाता है। आरबीआई और भारत सरकार के लिए यह घरेलू संपत्ति एक रणनीतिक अवसर बनकर उभर रही है

घरों में पड़ा सोना और उसकी ताकत

कुल 35,000 टन सोना(Gold) आज के भाव पर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का है, जो देश की सबसे बड़ी घरेलू बचत मानी जा सकती है। यह संपत्ति न तो उत्पादन में लग रही है और न ही वित्तीय तंत्र को मजबूती दे रही है। समानांतर अर्थव्यवस्था में पड़े इस सोने का उपयोग बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सकता है।

इस सोने को मुख्यधारा में लाने से सरकार को कर राजस्व मिलेगा, बाजार में नकदी बढ़ेगी और केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट मजबूत होगी। साथ ही विदेशी पूंजी पर निर्भरता कम होगी और देश की आर्थिक साख बेहतर बनेगी।

फायदे और मौजूदा विकल्प

सरकार के सामने अब तक दो प्रमुख रास्ते माने जाते रहे हैं। पहला, टैक्स के साथ माफी योजना, जिसे कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरा, सोने के बदले ऋण व्यवस्था, जिससे सोना अस्थायी रूप से ही प्रणाली में आता है। लेकिन इन दोनों से दीर्घकालिक समाधान नहीं निकलता।

इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि नीति को ऐसा होना चाहिए, जिससे सोना स्थायी रूप से वित्तीय तंत्र में शामिल हो और सरकार को भी प्रत्यक्ष लाभ मिले।

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आरबीआई की नई पहल का विचार

एक प्रस्तावित मॉडल के तहत आरबीआई नागरिकों से अंतरराष्ट्रीय दर पर सोना खरीदे। भुगतान का 65 प्रतिशत नकद और 35 प्रतिशत दीर्घकालीन शून्य-कूपन सरकारी बॉन्ड में हो। इससे विक्रेता को पूरा मूल्य मिलने का एहसास होगा और केंद्रीय बैंक को सोना कम लागत पर प्राप्त होगा।

यह योजना मनोवैज्ञानिक रूप से भी प्रभावी हो सकती है। लोग बिना किसी पूछताछ के सोना सौंपकर अपनी निष्क्रिय संपत्ति को उपयोगी बना सकेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को बड़ा संबल मिलेगा।

घरेलू सोने को औपचारिक व्यवस्था में लाने से आम लोगों को क्या मिलेगा

लोगों को अपनी जमा संपत्ति का बाजार मूल्य मिलेगा और नकदी उपलब्ध होगी। इससे निवेश और खर्च की क्षमता बढ़ेगी। दीर्घकाल में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।

इस प्रस्ताव से सरकार की वित्तीय स्थिति कैसे सुधरेगी

सरकार को अप्रत्यक्ष कर लाभ मिलेगा और केंद्रीय बैंक की स्थिति मजबूत होगी। विदेशी पूंजी पर निर्भरता घटेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक भरोसा भी बढ़ेगा।

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