2025 में गोल्ड ने दिया 70% रिटर्न
नई दिल्ली: सोने(Gold) की कीमतें $4,500 प्रति औंस के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब थोड़े ठहराव की स्थिति में हैं। तकनीकी इंडिकेटर(Technical Indicator) ’14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स’ (RSI) सोने के ‘ओवरबॉट जोन’ में होने का संकेत दे रहा है, जिसका अर्थ है कि कीमतों में अत्यधिक तेजी के बाद अब निवेशक अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली कर रहे हैं। हालांकि, इस साल सोने में 70% और प्लैटिनम की कीमतों में 140% तक का जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो 1979 के बाद का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है।
वैश्विक तनाव और फेड नीतियों का असर
कीमती धातुओं में इस तेजी का मुख्य कारण वेनेजुएला में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका द्वारा तेल टैंकरों पर लगाई गई पाबंदी है। अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सोने(Gold) को एक ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) मानते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीतियों ने भी बुलियन मार्केट को सहारा दिया है। सेंट्रल बैंकों की बढ़ती खरीदारी और गोल्ड-बैक्ड ETF में भारी निवेश ने कीमतों को नई ऊंचाइयों पर बनाए रखा है।
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चांदी और प्लैटिनम की भविष्य की चाल
चांदी पहली बार $70 प्रति औंस के पार निकल गई है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल सट्टेबाजी नहीं बल्कि वास्तविक औद्योगिक मांग के कारण है। प्लैटिनम भी $2,300 प्रति औंस के स्तर को पार कर चुका है, जिसे कम आपूर्ति और सप्लाई चैन की दिक्कतों से समर्थन मिल रहा है। गोल्डमैन सैक्स जैसे बड़े बैंकों का अनुमान है कि 2026 तक सोने(Gold) का भाव $4,900 प्रति औंस तक जा सकता है। आने वाले समय में अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट की जांच और ट्रेड टैरिफ के फैसले चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे।
‘डिबेसमेंट ट्रेड’ क्या है जिसने सोने की कीमतों को बढ़ाया?
डिबेसमेंट ट्रेड तब होता है जब निवेशकों को डर होता है कि सरकार पर बढ़ता कर्ज और मुद्रास्फीति समय के साथ उनकी करेंसी और सरकारी बॉन्ड की वैल्यू को कम कर देगी। ऐसे में वे बॉन्ड से पैसा निकालकर सोने(Gold) जैसी संपत्तियों में निवेश करते हैं, जिनकी अपनी आंतरिक वैल्यू होती है और जो मुद्रा की गिरावट से प्रभावित नहीं होतीं।
क्या अभी सोने-चांदी में निवेश करना सही है या कीमतों में गिरावट आएगी?
तकनीकी संकेत (RSI) बताते हैं कि बाजार अभी ‘ओवरबॉट’ है, इसलिए छोटी अवधि में कीमतों में कुछ गिरावट या सुधार आ सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के लिए गोल्डमैन सैक्स जैसे संस्थानों का अनुमान सकारात्मक है, जो 2026 तक कीमतों के और ऊपर जाने की संभावना जता रहे हैं।
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