Gold Silver: सोना-चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर

By Dhanarekha | Updated: January 9, 2026 • 8:46 PM

निवेश और कीमतों में उछाल का पूरा विश्लेषण

नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने और चांदी(Gold Silver) की कीमतों ने एक बार फिर छलांग लगाई है। 9 जनवरी 2026 को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,349 बढ़कर ₹1,37,122 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जबकि चांदी की कीमतों में ₹6,982 की भारी वृद्धि देखी गई, जिससे यह ₹2.42 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। विशेषज्ञों(Experts) का मानना है कि मांग में इसी तरह की बढ़ोतरी जारी रही, तो इस साल के अंत तक सोना 1.50 लाख और चांदी 2.75 लाख के स्तर को छू सकती है

वैश्विक और औद्योगिक कारणों से कीमतों में तेजी

कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण सक्रिय हैं। अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और वैश्विक तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध) के कारण निवेशक सोने को एक सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। वहीं, चांदी की कीमतों में उछाल(Gold Silver) का मुख्य कारण इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का कच्चा माल के रूप में बढ़ता इस्तेमाल इसकी कमी पैदा कर रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी होड़ मची हुई है।

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शहरों के अनुसार दामों में अंतर और शुद्धता की पहचान

अक्सर लोग इस बात से भ्रमित होते हैं कि अलग-अलग शहरों में सोने के भाव अलग क्यों होते हैं। इसका मुख्य कारण GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मुनाफा है, जो IBJA द्वारा जारी बेस रेट में शामिल नहीं होते। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा BIS हॉलमार्क (Alphanumeric Code) देखकर ही सोना खरीदें और खरीदारी से पहले 24, 22 और 18 कैरेट के बीच के अंतर को क्रॉस-चेक जरूर करें ताकि सही कीमत का भुगतान किया जा सके।

2025 में सोने और चांदी के रिटर्न में कितना अंतर रहा है?

साल 2025 निवेश के लिहाज से ऐतिहासिक रहा। सोने(Gold Silver) की कीमत में लगभग 75% की वृद्धि हुई, जबकि चांदी ने इसे कहीं पीछे छोड़ते हुए 167% का रिटर्न दिया। 31 दिसंबर 2024 के मुकाबले 2025 के अंत तक चांदी के दाम में ₹1,44,403 की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

क्या कारण है कि चांदी की मांग ज्वेलरी से ज्यादा उद्योगों में बढ़ रही है?

चांदी अब सिर्फ आभूषण तक सीमित नहीं है। सोलर एनर्जी सेक्टर, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में इसकी(Gold Silver) अनिवार्य भूमिका है। इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन में टैरिफ और ट्रेड वॉर के डर से कंपनियां पहले से ही भारी मात्रा में चांदी का स्टॉक जमा कर रही हैं, जो कीमतों को ऊपर ले जा रहा है।

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