हरियाणा सरकार के खातों में सेंध
मुंबई: IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में आज 23 फरवरी 2026 को भारी बिकवाली देखी गई, जिससे शेयर की कीमत 20% गिरकर ₹67 पर आ गई। इस गिरावट की मुख्य वजह बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में हुआ ₹590 करोड़ का फ्रॉड है, जो हरियाणा(Haryana) सरकार से जुड़ी संस्थाओं के खातों में अनधिकृत लेनदेन के जरिए किया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि धोखाधड़ी की यह राशि बैंक के तीसरी तिमाही के शुद्ध मुनाफे (₹503 करोड़) से भी अधिक है। हालांकि, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
बैंक की कार्रवाई और आंतरिक जांच
मामला सामने आते ही बैंक प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाते हुए चंडीगढ़ ब्रांच के 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन के अनुसार, यह कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि आंतरिक मिलीभगत का मामला है। जांच के लिए स्वतंत्र फॉरेंसिक अन्वेषक के रूप में ‘KPMG’ को नियुक्त किया गया है। बैंक ने उन खातों को फ्रीज करने के लिए दूसरे बैंकों को ‘रिकॉल नोटिस’ भी जारी किए हैं, जहाँ फ्रॉड का पैसा ट्रांसफर होने का संदेह है, ताकि रिकवरी की जा सके।
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निवेशकों और ग्राहकों के लिए क्या है सलाह?
मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज फर्म UBS का मानना है कि इस फ्रॉड(IDFC) का बैंक के वित्त वर्ष 2026 के मुनाफे पर लगभग 22% तक असर पड़ सकता है। जब तक फॉरेंसिक ऑडिट पूरा नहीं होता, शेयर पर दबाव बना रह सकता है। आम रिटेल ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि यह फ्रॉड केवल विशिष्ट सरकारी खातों तक सीमित है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने मोबाइल बैंकिंग अलर्ट चेक करते रहें और बैंक की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करें।
यह फ्रॉड बैंक के संज्ञान में कैसे आया?
मामला तब खुला जब हरियाणा सरकार के एक विभाग(IDFC) ने अपना खाता बंद करने और फंड ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट भेजी। प्रोसेस के दौरान बैंक बैलेंस और विभाग द्वारा बताई गई राशि में बड़ा अंतर पाया गया।
क्या बैंक के आम ग्राहकों का पैसा सुरक्षित है?
हाँ, बैंक के अनुसार यह मामला केवल चंडीगढ़ ब्रांच के विशिष्ट सरकारी खातों तक सीमित है। रिटेल ग्राहकों के खातों और बैंक के सामान्य बैंकिंग सिस्टम पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
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