Inflation Rises: जंग की आहट से बढ़ी महंगाई

Read Time:  1 min
Inflation Rises
Inflation Rises
FONT SIZE
GET APP

जंग की आहट से बढ़ी महंगाई

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल और कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल(Inflation Rises) ला दिया है, जिससे घरेलू स्तर पर रोजमर्रा की चीजों(Everyday Items) के दाम बढ़ने की तैयारी है। पिछले एक महीने में प्लास्टिक के कच्चे माल (जैसे एलडीपीई दाने) की कीमतों में 50% से 70% तक की वृद्धि हुई है। प्लास्टिक की टंकियों और कंटेनरों के दाम भी 40% तक बढ़ सकते हैं। ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अनुसार, इस संकट से लाखों लोगों की नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है और कई कारखाने बंद होने की कगार पर हैं

ईंधन संकट और बदलती उपभोक्ता आदतें

देश के कई हिस्सों में कमर्शियल एलपीजी की कमी के कारण लगभग 20 हजार छोटे उद्योगों पर ताला लग गया है। राजकोट, हैदराबाद(Hyderabad) और मध्य प्रदेश जैसे क्षेत्रों में गैस न मिलने से उत्पादन(Inflation Rises) ठप है। इस किल्लत के बीच शहरी घरों में खाना पकाने का तरीका बदल रहा है। लोग अब ‘रेडी टू ईट’ (तैयार भोजन) और इंडक्शन कुकटॉप की ओर रुख कर रहे हैं। बिगबॉस्केट और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इंस्टेंट नूडल्स, जूस और स्नैक्स की मांग में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, क्योंकि यह विकल्प गैस की बचत करते हैं।

अन्य पढ़े: कल से बढ़ जाएंगे जूते-चप्पलों के दाम

सीमेंट और अन्य क्षेत्रों पर आर्थिक दबाव

कच्चे तेल और कोयले की बढ़ती कीमतों का सीधा असर सीमेंट उद्योग पर पड़ा है। उत्पादन लागत में प्रति टन ₹150 से ₹200 तक की बढ़ोतरी हुई है। सीमेंट की बोरियों के लिए इस्तेमाल होने वाले पॉलीप्रोपाइलीन की कीमत बढ़ने से कंपनियों ने प्रति बोरी ₹15 से ₹20 तक दाम बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन बाजार में अधिक आपूर्ति होने के कारण उन्हें यह वृद्धि वापस लेनी पड़ी। हालांकि, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अब भी कीमतें बढ़ी हुई हैं, जिससे निर्माण कार्य महंगा हो सकता है।

प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में भारी वृद्धि की मुख्य वजह क्या है?

मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इससे प्लास्टिक बनाने वाले कच्चे माल (पॉलीमर) की कीमतों में 70% तक का उछाल आया है और एलपीजी की कमी ने उत्पादन लागत को और बढ़ा दिया है।

एलपीजी संकट का ‘रेडी टू ईट’ मार्केट पर क्या प्रभाव पड़ा है?

कमर्शियल गैस की किल्लत और रसोई में समय बचाने की चाहत में शहरी परिवारों ने ‘रेडी टू ईट’ उत्पादों को अपनाना शुरू कर दिया है। इसकी बिक्री सामान्य से 10% अधिक हो गई है और इंडक्शन कुकटॉप की मांग भी 10 गुना तक बढ़ गई है।

अन्य पढ़े:

Dhanarekha

लेखक परिचय

Dhanarekha

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।