धार्मिक प्रतीकों पर ‘दोहरे मानदंड’ के आरोपों से गरमाया बाजार
नई दिल्ली: चश्मा रिटेल दिग्गज लेंसकार्ट (Lenskart) उस समय विवादों में घिर गई जब सोशल मीडिया पर उनकी एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ के स्क्रीनशॉट वायरल हो गए। इस डॉक्यूमेंट में महिला कर्मचारियों को बिंदी, क्लचर और कलावा (धार्मिक धागा) पहनने से मना किया गया था। विवाद तब और बढ़ा जब यह देखा गया कि इसी गाइडलाइन में हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों (जैसे काला रंग और लोगो न ढंकना) के साथ अनुमति(Permission) दी गई थी। लेखिका शेफाली वैद्य सहित कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस नीति को भेदभावपूर्ण बताते हुए सीईओ पीयूष बंसल से तीखे सवाल पूछे।
सीईओ पीयूष बंसल की सफाई और कंपनी का पक्ष
मामला तूल पकड़ते ही लेंसकार्ट के को-फाउंडर और सीईओ पीयूष बंसल ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि वायरल हो रहा डॉक्यूमेंट पुराना और गलत है और यह कंपनी की वर्तमान नीतियों(Current Policies) को नहीं दर्शाता है। बंसल ने जोर देकर कहा कि लेंसकार्ट सभी धर्मों का समान सम्मान करती है और उनके हजारों कर्मचारी रोजाना अपनी संस्कृति और विश्वास के प्रतीकों को गर्व के साथ पहनकर स्टोर्स पर काम करते हैं। उन्होंने इस विवाद को भ्रामक बताया।
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IPO की तैयारी और ब्रांड इमेज पर असर
यह विवाद लेंसकार्ट के लिए काफी संवेदनशील समय पर आया है, क्योंकि कंपनी जल्द ही अपना IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) लाने की तैयारी कर रही है। लगभग ₹50,000 करोड़ की वैल्यूएशन वाली इस यूनिकॉर्न कंपनी के शेयरों में हाल ही में तेजी देखी गई थी। जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में धार्मिक भेदभाव के आरोप कंपनी की ब्रांड इमेज और आगामी लिस्टिंग पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, यही कारण है कि प्रबंधन ने इस पर तुरंत सफाई देना जरूरी समझा।
लेंसकार्ट की कथित वायरल गाइडलाइन में किन चीजों पर रोक लगाने की बात कही गई थी?
वायरल डॉक्यूमेंट के अनुसार, कर्मचारियों को बिंदी, कलावा (धार्मिक धागा), रिस्ट बैंड और बालों में बड़े क्लचर लगाने की मनाही थी, जबकि बुर्का पहनकर काम करने पर भी रोक का जिक्र था।
पीयूष बंसल ने इस विवाद पर क्या मुख्य तर्क दिया है?
पीयूष बंसल ने कहा कि वायरल हो रहा डॉक्यूमेंट पुराना है और कंपनी की मौजूदा गाइडलाइन्स सभी धर्मों के प्रति सम्मान रखती हैं, जिसमें कर्मचारी अपनी पसंद के धार्मिक प्रतीक पहन सकते हैं।
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