10 लाख गाड़ियों का सफर और भविष्य का लक्ष्य
लखनऊ: लखनऊ के चिनहट स्थित देवा रोड प्लांट में बनी 10 लाखवीं गाड़ी (एक ई-बस) (Tata Motors) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने टाटा समूह की सराहना करते हुए कहा कि टाटा का नाम ‘भरोसे’ का प्रतीक है और बचपन से ही इनकी गाड़ियां(Vehicles) हमारे जीवन का हिस्सा रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूपी अब एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ बेहतर कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योगों को नई गति दे रहे हैं।
विस्तार और रोजगार के नए अवसर
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस मौके पर एक बड़ी घोषणा(Big Announcement) करते हुए कहा कि जहाँ 10 लाख का आंकड़ा छूने में 1992 से अब तक का समय लगा, वहीं कंपनी का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में अगले 20 लाख वाहन तैयार करने का है। यह प्लांट न केवल 8 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है, बल्कि एक मजबूत सप्लाई चेन इकोसिस्टम के जरिए हजारों परिवारों की आजीविका का आधार भी है।
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वैश्विक पहचान और सस्टेनेबिलिटी
लखनऊ प्लांट में बनी कमर्शियल गाड़ियां और बसें दुनिया के 15 देशों में एक्सपोर्ट की जाती हैं। खास बात यह है कि यह प्लांट ‘जीरो वेस्ट’ (Tata Motors) के सिद्धांत पर काम करता है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी मिसाल है। सीएम ने कहा कि यूपी के 56% युवाओं को टेक्नोलॉजी और स्किल से जोड़कर उन्हें ‘मार्केट-रेडी’ बनाया जा रहा है, ताकि टाटा जैसे बड़े समूह को कुशल वर्कफोर्स मिल सके।
टाटा मोटर्स के लखनऊ प्लांट की स्थापना कब हुई थी और इसका क्या महत्व है?
मोटर्स (Tata Motors) के लखनऊ प्लांट की स्थापना 1992 में हुई थी। यह प्लांट मुख्य रूप से कमर्शियल व्हीकल (ट्रक और बस) बनाता है। यहाँ से उत्पादित गाड़ियां भारत के साथ-साथ दुनिया के 15 देशों में भेजी जाती हैं, जो यूपी को वैश्विक एक्सपोर्ट मानचित्र पर मजबूती देता है।
टाटा संस के चेयरमैन ने भविष्य के लिए क्या लक्ष्य निर्धारित किया है?
चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी ने अगले 5 वर्षों में 20 लाख और गाड़ियां बनाने का लक्ष्य रखा है। यह उत्तर प्रदेश में टाटा समूह के बढ़ते निवेश और राज्य की औद्योगिक नीतियों के प्रति उनके विश्वास को दर्शाता है।
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