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Breaking News: Magnets: भारत चुनौती देगा चीन की मैग्नेट बादशाहत

Dhanarekha
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Breaking News: Magnets: भारत चुनौती देगा चीन की मैग्नेट बादशाहत

7,280 करोड़ की नई सरकारी योजना

नई दिल्‍ली: केंद्र सरकार ने दुर्लभ पृथ्वी चुंबक निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की विशाल योजना को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिज और हाई-टेक मैग्नेट(Magnets) उत्पादन के लिए दूसरे देशों, विशेषकर चीन(China), पर निर्भरता कम करना है। यह योजना अगले सात वर्षों तक लागू रहेगी और इसके तहत लगभग 6,000 टन रियर अर्थ मैग्नेट बनाने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

ये चुंबक इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स, पवन टर्बाइनों और उन्नत निर्माण क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने से देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। इस परियोजना के लिए वित्त मंत्रालय पहले ही सहमति दे चुका था और आज दोपहर कैबिनेट बैठक में अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई

घरेलू उत्पादन क्षमता और रणनीतिक लाभ

यह योजना अवार्ड की तारीख से अगले सात वर्षों तक मान्य रहेगी, जिसमें संयंत्र स्थापित करने के लिए दो वर्षों की तैयारी अवधि शामिल है। इसके बाद मैग्नेट के व्यावसायिक उत्पादन पर पांच वर्षों तक प्रोत्साहन दिए जाएंगे। यदि यह लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में आ जाएगा।

फिलहाल दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुम्बकों के लिए भारत की निर्भरता लगभग पूरी तरह चीन पर है। यह स्थिति न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सामरिक दृष्टि से भी जोखिमपूर्ण मानी जाती है। इसलिए यह योजना प्रक्रिया, परिशोधन और मैग्नेट निर्माण की सम्पूर्ण क्षमता भारत में विकसित कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा को चुनौती देने में मदद करेगी।

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औद्योगिक विकास में नया मोड़

यह परियोजना सरकार के उस व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है जिसके तहत उभरते तकनीकी क्षेत्रों में दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। इसका उद्देश्य विदेशी और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करना, वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना और रणनीतिक सामग्रियों की सतत उपलब्धता को सुनिश्चित करना है। परिणामस्वरूप, भारत हाई-टेक उत्पाद विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रहा है।

इस योजना सहित केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुल ₹19,919 करोड़ की चार प्रमुख परियोजनाओं को एक साथ मंजूरी दी है। इनमें सबसे बड़ा आवंटन ₹9,858 करोड़ पुणे(Pune) मेट्रो विस्तार के लिए दिया गया है, जिससे शहरी परिवहन प्रणाली को गति मिलने की उम्मीद है, साथ ही औद्योगिक गतिविधि में भी सुधार संभव है।

क्या इस योजना से चीन पर निर्भरता कम होगी?

निश्चित ही, घरेलू स्तर पर प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और मैग्नेट निर्माण तंत्र विकसित होने से आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे न केवल लागत नियंत्रण में सहूलियत मिलेगी बल्कि रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता भी मजबूती से स्थापित होगी।

उद्योग जगत के लिए यह योजना कितनी लाभकारी होगी?

नई प्रोत्साहन संरचनाएँ कंपनियों को निवेश करने के लिए आकर्षित करेंगी, जिससे रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, उभरते ईवी और रक्षा उद्योगों को स्थायी सप्लाई चेन मिलने से उत्पादन गति पकड़ सकेगा और भारत वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में उभर सकता है।

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