सेंसेक्स 583 अंकों की गिरावट के साथ 76,913 पर बंद हुआ
भारतीय शेयर बाज़ार में आज कमजोरी देखने को मिली, जहाँ सेंसेक्स 583 अंकों की गिरावट के साथ 76,913 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी भी 180 अंक गिरकर 23,998 पर आ गया। दिनभर के कारोबार में निवेशकों का रुझान सतर्क नजर आया।
गिरावट की मुख्य वजहें
1. ग्लोबल संकेत कमजोर
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से मिले नकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाज़ार (Indian Stock) पर भी पड़ा। एशियाई और अमेरिकी बाज़ारों में गिरावट से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
2. सेक्टर-विशेष दबाव
मेटल और बैंकिंग सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे इंडेक्स पर दबाव बढ़ा।
बैंकिंग शेयरों में दबाव
बैंकिंग सेक्टर के प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिसके चलते बड़े बैंकिंग स्टॉक्स लाल निशान में बंद हुए।
- प्राइवेट और पब्लिक दोनों बैंक प्रभावित
- ब्याज दरों और लिक्विडिटी को लेकर चिंताएं
भारतीय शेयर बाज़ार सेंसेक्स में आज यानी गुरुवार, 30 अप्रैल को 583 अंक (0.75%) की गिरावट रही। ये 76,913 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 180 अंकों (0.74%) की गिरावट रही, ये 23,998 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में आईटी में सबसे ज्यादा खरीदारी रही, जबकि मेटल और सरकारी बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली।
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जियोपॉलिटिकल तनाव और जंग जैसी स्थिति में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इससे कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है। ऐसे में निवेशक अपने शेयर बेचना शुरू कर देते हैं और सुरक्षित जगह निवेश करते हैं। इससे बाजार में गिरावट आती है।
- ईरान-इजराइल युद्ध से सप्लाई चेन बिगड़ने का डर।
- कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल और महंगाई बढ़ेगी।
- अमेरिका और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारत पर।
एशियाई बाजार में आज गिरावट रही
| इंडेक्स | लेवल | पॉइंट चेंज | परसेंट चेंज |
| कोस्पी (साउथ कोरिया) | 6599 | -92 | -1.38% |
| निक्केई (जापान) | 59285 | -633 | -1.06% |
| हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) | 25777 | -335 | -1.28% |
29 अप्रैल को अमेरिकी बाजार में गिरावट रही
| इंडेक्स | लेवल | पॉइंट चेंज | परसेंट चेंज |
| डाउ जोन्स | 48862 | -280 | -0.57% |
| नैस्डैक | 24673 | +9 | +0.04% |
| S&P 500 | 7136 | -3 | -0.04% |
ब्रेंट क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार
ब्रेंट क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया हैं। 2022 के बाद पहली बार कच्चा तेल 120 डॉलर डॉलर के पार निकला है। बाजार में तेल की मजबूत डिमांड और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को लेकर चिंता बढ़ी है जिस वजह से ये तेजी आई है। हॉर्मुज को तेल की सप्लाई के लिए सबसे अहम रास्ता माना जाता है।
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