वैश्विक महंगाई दबाव में इजाफे के संकेत
नई दिल्ली: दुनिया भर में कच्चे तेल की ढुलाई का खर्च अचानक कई गुना बढ़ गया है, जिससे वैशिक बाजार में महंगाई का जोखिम और अधिक गहरा दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) द्वारा रूस(Russia) की प्रमुख कंपनियों पर लगाए गए नए प्रतिबंधों और मध्य पूर्व से तेजी से बढ़ती तेल(Oil) सप्लाई ने जहाजों की मांग को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है। इसी वजह से बड़े टैंकरों का किराया पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता की संभावना जोर पकड़ रही है।
टैंकर किराए में रिकॉर्ड स्तरों की छलांग
बहुत बड़े कच्चे तेल(Oil) वाहक VLCC जहाजों, जो मध्य पूर्व से चीन तक लगभग 20 लाख बैरल ले जाते हैं, का किराया पिछले सप्ताह 1,37,000 डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गया। यह वर्ष की शुरुआत की तुलना में लगभग 576% अधिक है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि यह अप्रैल 2020 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है और दो सप्ताह पहले बने बहुवर्षीय शिखर को भी पार कर चुका है। इसी श्रेणी के एक व्यापक इंडेक्स ने भी 1,16,400 डॉलर प्रतिदिन का आंकड़ा छू लिया, जो पांच साल का एक नया रिकॉर्ड है।
ट्रंप द्वारा रूस की कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए प्रतिबंध लागू होते ही वैश्विक रिफाइनर नए सप्लायरों की ओर बढ़ने लगे। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और OPEC+ देशों से अतिरिक्त तेल की उपलब्धता ने टैंकरों की बुकिंग की रफ्तार तेज की है। खासकर भारत और चीन के आयातकों ने विकल्प तलाशते हुए अधिक जहाजों की मांग पेश की, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया।
छोटे जहाजों तक पहुंची तेज़ी की लहर
बाजार गतिविधियों में हुए परिवर्तन के कारण नवंबर के अंत और दिसंबर की लोडिंग के लिए बड़ी संख्या में जहाजों की बुकिंग देखी गई। केवल मध्य पूर्व से कच्चे तेल की ढुलाई के लिए लगभग एक दर्जन VLCC की मांग सामने आई, जिससे पूरे टैंकर सेक्टर में कमाई बढ़ती चली गई।
यह प्रभाव छोटे जहाजों तक भी पहुंचा, जहाँ Suezmaxes और Aframaxes की मांग में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। Vortexa के विश्लेषकों के मुताबिक Suezmax जहाजों को बड़े कार्गो लोड करने के लिए मध्य पूर्व की ओर भेजा जा रहा है। वहीं अफ्रामैक्स जहाजों का किराया भी बढ़कर 51,000 डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो उनके लिए असाधारण स्तर माना जा रहा है।
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महंगाई पर संभावित प्रभाव
रूस से सप्लाई कम होने और दूसरे क्षेत्रों से आयात तेजी पकड़ने के बाद जहाज किराया लगातार बढ़ रहा है। जब परिवहन खर्च बढ़ता है, तो तेल की अंतिम कीमत पर भी दबाव आता है, क्योंकि कंपनियों को अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ती है।
इससे पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों के दाम ऊपर जा सकते हैं, जिससे महंगाई में वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है। यदि यह स्थिति लंबी चली तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ और बढ़ सकता है, क्योंकि ऊर्जा लागत हर क्षेत्र को प्रभावित करती है।
VLCC जहाजों के किराए में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण क्या माना जा रहा है?
VLCC जहाजों की मांग अचानक बढ़ जाने के साथ अमेरिकी प्रतिबंधों ने बाजार को असंतुलित कर दिया है। रूस की प्रमुख कंपनियों के प्रतिबंधित होने पर रिफाइनर नए सप्लायरों की ओर मुड़ गए, जिससे टैंकरों के किराए तेजी से ऊपर जाने लगे। इसी बदलाव में मध्य पूर्व और अमेरिका से आई अतिरिक्त सप्लाई ने दबाव को और बढ़ाया।
क्या तेल परिवहन खर्च बढ़ने से वास्तविक ईंधन कीमतें भी बढ़ेंगी?
टैंकर किराया ऊंचा होने से कंपनियों को परिवहन के लिए अधिक भुगतान करना पड़ता है, जिससे कच्चे तेल की लागत प्रभावित होती है। जब यह बढ़ोतरी रिफाइनरियों तक पहुंचती है, तो ईंधनों की अंतिम कीमतें बढ़ने की आशंका रहती है। यदि यह रुझान जारी रहा तो उपभोक्ता स्तर पर महंगाई बढ़ना लगभग निश्चित है।
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