Online Food: महंगा होता ऑनलाइन खाना

By Dhanarekha | Updated: January 7, 2026 • 3:56 PM

55% उपभोक्ता चुका रहे हैं रेस्टोरेंट से अधिक दाम

नई दिल्ली/मुंबई: लोकलसर्किल्स के नवीनतम सर्वे में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आधे से अधिक (55%) फूड ऐप यूजर्स रेस्टोरेंट की तुलना(Compare) में ऑनलाइन(Online Food) खाने के लिए ज्यादा भुगतान कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स द्वारा रेस्टोरेंट से वसूला जाने वाला 20 से 30% तक का भारी कमीशन है। रेस्टोरेंट मालिक इस अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए ऐप पर डिश की कीमतें बढ़ा देते हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है

तेजी से बढ़ता बाजार और 2030 का भविष्य

भारत में ऑनलाइन फूड डिलीवरी का बाजार वर्तमान में लगभग ₹2.86 लाख करोड़ का है, जिसके 2030 तक ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। स्मार्टफोन और इंटरनेट(Internet) की सुलभता ने शहरी और ग्रामीण(Online Food) दोनों क्षेत्रों में खाने के ऑर्डर करने के तरीके को बदल दिया है। सर्वे में शामिल 359 जिलों के डेटा से पता चलता है कि टियर-1 शहरों के साथ-साथ अब छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) में भी क्विक कॉमर्स का चलन तेजी से पैर पसार रहा है।

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सेहत पर भारी पड़ता जंक फूड का बढ़ता चलन

क्विक डिलीवरी ऐप्स न केवल महंगे हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय बन रहे हैं। सर्वे के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स(Online Food) पर मिलने वाले आधे से ज्यादा उत्पाद हाई फैट, शुगर और सॉल्ट (HFSS) वाले हैं। हर 10 में से 4 घरों में नियमित रूप से चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और नूडल्स जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ऑर्डर किए जा रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि इस जंक फूड कल्चर का सबसे ज्यादा शिकार बच्चे और युवा हो रहे हैं।

फूड डिलीवरी ऐप्स पर खाना रेस्टोरेंट की तुलना में महंगा क्यों होता है?

इसके दो प्रमुख कारण हैं। पहला, फूड ऐप्स रेस्टोरेंट(Online Food) से भारी कमीशन (20-30%) लेते हैं, जिसे रेस्टोरेंट मेन्यू की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों पर डाल देते हैं। दूसरा, ऐप्स अलग से डिलीवरी शुल्क, प्लेटफॉर्म फीस और हैंडलिंग चार्ज भी वसूलते हैं, जिससे अंतिम बिल रेस्टोरेंट के बिल से काफी ज्यादा हो जाता है।

सर्वे के अनुसार क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

सर्वे से पता चलता है कि इन ऐप्स पर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और जंक फूड का विकल्प 50% से अधिक है। आसानी से उपलब्ध होने के कारण लोग ताजे खाने के बजाय पैकेट बंद चिप्स, बिस्किट और नूडल्स ज्यादा मंगवा रहे हैं। इससे मोटापे और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, खासकर युवाओं और बच्चों में।

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