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SIM Binding: सिम बाइंडिंग: अब 1 जनवरी 2027 से बदल जाएंगे मैसेजिंग ऐप्स के नियम

Author Icon By Dhanarekha
Updated: April 2, 2026 • 2:08 PM
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सरकार ने बढ़ाई डेडलाइन

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) नियमों को लागू करने की समय-सीमा को आगे बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया है। इसका मतलब है कि अब ये कड़े नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। पहले इन नियमों को जल्द लागू किया जाना था, लेकिन तकनीकी चुनौतियों और इंडस्ट्री एसोसिएशन (IAMAI) की चिंताओं को देखते हुए सरकार ने कंपनियों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय दिया है। यह कदम डिजिटल सुरक्षा और यूजर सुविधा(User Convenience) के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है

क्या है सिम बाइंडिंग: बिना सिम नहीं चलेगा वॉट्सएप

सिम बाइंडिंग(SIM Binding) एक ऐसी तकनीक है जो आपके मैसेजिंग अकाउंट (जैसे वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल) को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ डिजिटल रूप से ‘लॉक’ कर देती है। नए नियम लागू होने के बाद, आपका मैसेजिंग ऐप केवल उसी स्मार्टफोन पर काम करेगा जिसमें वह सिम कार्ड लगा होगा। यदि आप फोन से सिम कार्ड निकालते हैं, तो ऐप काम करना बंद कर देगा। यहाँ तक कि कंप्यूटर या लैपटॉप पर लॉग-इन वॉट्सएप भी हर 6 घंटे में अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा, जिससे सुरक्षा का एक अतिरिक्त घेरा तैयार होगा।

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साइबर फ्रॉड पर लगाम: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कड़ा कदम

सरकार का मानना है कि सिम बाइंडिंग से साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय ठगी की घटनाओं में भारी कमी आएगी। वर्तमान में ठग अक्सर ओटीपी (OTP) बाईपास या अन्य तरीकों से किसी और के नंबर पर मैसेजिंग ऐप चला लेते हैं, लेकिन नए नियमों के बाद फिजिकल सिम के बिना यह नामुमकिन होगा। केंद्रीय संचार मंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा और यूजर्स की प्राइवेसी के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी, इसलिए सभी टेक कंपनियों को निर्धारित समय के भीतर इसकी रिपोर्ट देनी होगी।

सिम बाइंडिंग नियम से डेस्कटॉप या वेब यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

नए नियमों के अनुसार, जो यूजर्स कंप्यूटर या लैपटॉप पर वॉट्सएप (WhatsApp Web) का इस्तेमाल करते हैं, उनका अकाउंट हर 6 घंटे में अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा। उन्हें दोबारा लॉग-इन करने के लिए अपने उस फोन की जरूरत होगी जिसमें सक्रिय सिम कार्ड मौजूद हो।

क्या यह नियम केवल वॉट्सएप पर लागू होगा?

नहीं, यह नियम वॉट्सएप के साथ-साथ टेलीग्राम, सिग्नल और अन्य सभी ओटीटी (OTT) मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा जो मोबाइल नंबर आधारित प्रमाणीकरण का उपयोग करते हैं। इसका उद्देश्य पूरे डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाना है।

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