अमेरिका ने लगाया 126% आयात शुल्क
वाशिंगटन: अमेरिका ने भारत से आने वाले सोलर पैनल(Solar Industry) और सेल पर 126% की शुरुआती ड्यूटी (लेवी) लगा दी है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग का आरोप है कि भारतीय निर्माता अपनी सरकार से अनुचित सब्सिडी प्राप्त कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान(Loss) हो रहा है। इस फैसले का सीधा असर यह होगा कि भारतीय सोलर उत्पादों की कीमत अमेरिका में दोगुनी से भी अधिक हो जाएगी, जिससे अमेरिकी खरीदार अब भारतीय माल के बजाय स्थानीय या अन्य सस्ते विकल्पों की ओर रुख करेंगे। भारत के साथ-साथ लाओस और इंडोनेशिया पर भी 81% से 143% तक का टैक्स थोपा गया है।
चीन पर ‘वाया रूट’ एक्सपोर्ट करने का आरोप
इस कड़े कदम के पीछे मुख्य कारण चीनी कंपनियों की चालाकी बताई जा रही है। अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स का दावा है कि चीन की कंपनियां(Solar Industry) अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए भारत, इंडोनेशिया और लाओस जैसे देशों के जरिए अपना सस्ता माल अमेरिका(America) भेज रही हैं। पहले चीन ने इसके लिए वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों का सहारा लिया था, लेकिन वहां सख्ती होने के बाद अब भारत को ‘ट्रांजिट रूट’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने ऊंचे टैक्स के बाद अब भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे लगभग बंद हो सकते हैं।
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डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियां और भविष्य की अनिश्चितता
यह नई ड्यूटी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा घोषित 10% ग्लोबल टैरिफ से पूरी तरह अलग है। अमेरिका के ‘अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड’ ने इस फैसले(Solar Industry) का स्वागत करते हुए इसे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की बहाली बताया है। फिलहाल यह जांच शुरुआती चरण में है और इस पर अंतिम फैसला 6 जुलाई 2026 को आएगा। यदि सब्सिडी और डंपिंग के आरोप साबित हो जाते हैं, तो यह टैक्स स्थायी कर दिया जाएगा। 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग ₹7,200 करोड़ के सोलर उत्पाद भेजे थे, जो अब दांव पर लग गए हैं।
एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी में क्या अंतर है?
जब कोई देश अपने माल को घरेलू बाजार से भी कम कीमत पर दूसरे देश में बेचता है, तो उसे रोकने के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जाती है। वहीं, यदि कोई सरकार(Solar Industry) अपने एक्सपोर्टर्स को सब्सिडी देकर कीमतें कम करवाती है, तो उस लाभ को खत्म करने के लिए काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई जाती है।
अमेरिका के इस फैसले का भारतीय कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
भारतीय सोलर एक्सपोर्टर्स के लिए अमेरिकी बाजार में टिकना नामुमकिन हो जाएगा क्योंकि 126% ड्यूटी के बाद उनके उत्पाद बहुत महंगे हो जाएंगे। भारत ने पिछले 2 सालों में अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट में 9 गुना बढ़ोतरी की थी, जिस पर अब पूरी तरह से रोक लग सकती है।
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