30 लाख करोड़ डॉलर के बाजार का रास्ता साफ
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुए नए समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों(Trade Agreement) को बड़ी राहत मिली है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैक्स को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है। इस फैसले से विशेष रूप से एमएसएमई (MSME), किसान और मछुआरे लाभान्वित होंगे। साथ ही, जेनेरिक दवाएं, हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जों पर टैरिफ को शून्य कर दिया गया है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।
बाजार पहुंच और नॉन-टैरिफ बाधाओं का समाधान
दोनों देशों ने न केवल टैक्स कम करने पर सहमति जताई है, बल्कि व्यापार में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को दूर करने का भी वादा किया है। भारत ने अमेरिकी मेडिकल डिवाइस और आईसीटी(Trade Agreement) उत्पादों के लिए लाइसेंसिंग और पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, भारत अगले 6 महीनों में कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी स्टैंडर्ड्स और टेस्टिंग को सीधे मान्यता देने पर विचार करेगा। इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में व्यापार करना सरल होगा और भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ती व बेहतर अमेरिकी तकनीक मिल सकेगी।
अन्य पढ़े: RBI की मौद्रिक नीति: रेपो रेट स्थिर, आम आदमी को EMI में राहत
भविष्य की योजना: 500 अरब डॉलर की खरीदारी और रोजगार
इस समझौते के तहत भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (लगभग 45 लाख करोड़ रुपये) के उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें मुख्य रूप से ऊर्जा उत्पाद, विमान, कोकिंग कोल और उच्च तकनीक वाले उत्पाद शामिल होंगे। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इस साझेदारी से भारत के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर(Trade Agreement) का वैश्विक बाजार खुलेगा, जिससे देश के युवाओं और महिलाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होंगे। यह समझौता भविष्य में होने वाले व्यापक ‘द्विपक्षीय व्यापार समझौते’ (BTA) की एक मजबूत नींव है।
इस समझौते से आम भारतीय उपभोक्ताओं को क्या लाभ होगा?
समझौते से अमेरिकी मेडिकल डिवाइस और तकनीकी उत्पादों पर लगने वाली बाधाएं कम होंगी। इसके परिणामस्वरूप भारतीय अस्पतालों में बेहतर इलाज और मरीजों को सस्ती अमेरिकी स्वास्थ्य तकनीक उपलब्ध होगी। साथ ही, आईटी क्षेत्र में भी उत्पादों की कीमतें कम होने की संभावना है।
‘नॉन-टैरिफ बैरियर्स’ क्या होते हैं जिन्हें हटाने की बात कही गई है?
ये ऐसी बाधाएं हैं जो सीधे तौर पर टैक्स नहीं होतीं, लेकिन व्यापार(Trade Agreement) को धीमा कर देती हैं। उदाहरण के लिए, जटिल लाइसेंस प्रक्रिया, उत्पादों की दोबारा टेस्टिंग, या कठिन कागजी कार्रवाई। इन्हें हटाने से सामान एक देश से दूसरे देश में जल्दी और कम खर्च में पहुंच पाता है।
अन्य पढ़े: