3 साल की सबसे बड़ी मजबूती
मुंबई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ(Tariff) को 50% से घटाकर 18% करने के ऐलान के बाद भारतीय रुपया(Trade Deal) मंगलवार को 130 पैसे (1.2%) मजबूत होकर 90.20 के स्तर पर पहुंच गया। यह 2025 की उस मंदी के बाद एक बड़ी राहत है, जब रुपया एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बन गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से बाजार में अनिश्चितता खत्म हुई है और विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा दोबारा भारतीय बाजार पर बढ़ा है।
‘गिव एंड टेक’ समझौते के मुख्य बिंदु
रुपए की इस मजबूती के पीछे भारत और अमेरिका के बीच हुआ एक रणनीतिक समझौता है। समझौते के तहत भारत अब रूस(Trade Deal) के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। साथ ही, भारत ने अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य की एनर्जी, टेक्नोलॉजी और कृषि उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बदले में अमेरिका ने भारतीय निर्यातकों के लिए टैरिफ में भारी कटौती की है, जिससे भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में फिर से प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।
अन्य पढ़े: डॉलर के मुकाबले 119 पैसे मजबूत
भविष्य का अनुमान और RBI की भूमिका
करेंसी मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपए की तेजी अभी थमने वाली नहीं है। शॉर्ट टर्म में रुपया 89.00 के स्तर तक जा सकता है। हालांकि, यह काफी हद तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप पर निर्भर करेगा। यदि रुपया बहुत अधिक मजबूत होता है, तो निर्यातकों को नुकसान हो सकता है, ऐसे में RBI बाजार को स्थिर करने के लिए कदम उठा सकता है। टैरिफ में कटौती से भारत के निर्यात क्षेत्र(Trade Deal) को भारी मुनाफे की उम्मीद है, जिससे डॉलर का प्रवाह भारत की ओर बढ़ेगा।
रूस से तेल न खरीदकर अमेरिका से तेल खरीदने का रुपए पर क्या असर होगा?
जब भारत अमेरिका(Trade Deal) से तेल खरीदेगा, तो यह एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का हिस्सा होगा जिससे व्यापार असंतुलन कम होगा। रूस से तेल खरीदने पर लगे प्रतिबंधों और पेमेंट की समस्याओं के कारण रुपए पर दबाव रहता था। अमेरिका के साथ एनर्जी डील होने से डॉलर की सप्लाई और मांग में एक संतुलन बनेगा, जो रुपए को लंबी अवधि में स्थिरता प्रदान करेगा।
टैरिफ में कटौती का भारतीय निर्यातकों को क्या लाभ मिलेगा?
टैरिफ 50% से घटकर 18% होने का मतलब है कि अमेरिका में भारतीय सामान अब काफी सस्ते बिकेंगे। इससे टेक्सटाइल, ज्वेलरी और आईटी जैसे सेक्टर के निर्यात में भारी बढ़ोतरी होगी। जब भारत का निर्यात बढ़ता है, तो देश में विदेशी मुद्रा (डॉलर) अधिक आती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ता है और रुपया मजबूत होता है।
अन्य पढ़े: