Dhandoraa movie review : धंडोरा एक छोटे बजट की फिल्म है, जिसने अपने प्रमोशनल कंटेंट से पहले ही अच्छी चर्चा बटोर ली थी। शिवाजी, नंदू, नवदीप, बिंदु माधवी जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म 25 दिसंबर को रिलीज़ हुई। निर्देशक मुरलीकांत देवसोत ने जातिगत भेदभाव जैसे संवेदनशील मुद्दे को नए नजरिए से पेश करने की कोशिश की है।
कहानी 2004 के संयुक्त आंध्र प्रदेश की पृष्ठभूमि में आधारित है। एक किसान और उसके बच्चों के इर्द-गिर्द घूमती यह कहानी प्रेम, सामाजिक भेदभाव और उसके परिणामों को दिखाती है। फिल्म की शुरुआत एक चौंकाने वाले दृश्य से होती है, जिसके बाद फ्लैशबैक में कहानी आगे बढ़ती है।
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फिल्म की खास बात यह है कि यह सिर्फ निचली जाति के (Dhandoraa movie review) उत्पीड़न पर ही नहीं रुकती, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक उच्च जाति का व्यक्ति भी परिस्थितियों का शिकार बन सकता है। दूसरे हाफ में कहानी मजबूत होती है और कोर्टरूम से लेकर क्लाइमैक्स तक घटनाएं प्रभावी ढंग से सामने आती हैं।
शिवाजी ने नकारात्मक शेड्स वाले किरदार में दमदार अभिनय किया है। नंदू का प्रदर्शन भी सराहनीय है, खासकर तब जब उनका किरदार अपने पिता के फैसलों से असहमत दिखता है। नवदीप सरपंच के रूप में हल्का हास्य लेकर आते हैं, जिससे गंभीर माहौल में राहत मिलती है।
हालांकि, फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा है और स्क्रीनप्ले में टाइमलाइन की अदला-बदली कुछ जगहों पर कमजोर लगती है। संगीत निर्देशक मार्क के रॉबिन का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को मजबूती देता है।
कुल मिलाकर, धंडोरा एक ईमानदार कोशिश है, जो सामाजिक भेदभाव जैसे मुद्दे को गंभीरता से उठाती है। कमजोर पहला हाफ होने के बावजूद, मजबूत दूसरा भाग और अच्छे अभिनय के कारण यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है।
रेटिंग: 3/5
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