DGP: सीपीआई माओवादी के चार शीर्ष भूमिगत नेताओं ने छोड़ा संगठन

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हैदराबाद । सीपीआई माओवादी (Maoist) के चार शीर्ष भूमिगत नेताओं ने संगठन छोड़ दिया है। वे तेलंगाना पुलिस के समक्ष मुख्यधारा में लौटे है। तेलंगाना (Telangana) में प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी)को बड़ा झटका लगा है।

पुलिस के समक्ष स्वेच्छा से आत्मसमर्पण

संगठन के चार वरिष्ठ नेताओं ने मंगलवार को पुलिस के समक्ष स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी, मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, बडे चोक्का राव उर्फ दामोदर और नूने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना शामिल हैं। मुख्यधारा में लौटने वालों में पोलित ब्यूरो सदस्य (पीबीएम) टिप्पिरी थिरुपति उर्फ देवुजी उर्फ कुम्मा दादा, केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, तेलंगाना राज्य समिति (टीएससी) के सचिव बडे चोक्का राव उर्फ दामोदर उर्फ जगन तथा राज्य समिति सदस्य (एससीएम) नूने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नू दादा शामिल हैं।

इन चारों नेताओं ने पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी की उपस्थिति में आत्मसमर्पण किया। डीजीपी ने बताया कि पोलित ब्यूरो सदस्य देवुजी और केंद्रीय समिति सदस्य संग्राम के मुख्यधारा में लौटने से संगठन की शीर्ष संरचना प्रभावी रूप से ध्वस्त हो गई है। वहीं दामोदर (राज्य सचिव) और गंगन्ना (राज्य समिति सदस्य) की वापसी से तेलंगाना राज्य समिति भी निष्क्रिय हो गई है।

सीएम ए. रेवंत रेड्डी की अपील से प्रेरित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ा

देवुजी पिछले 44 वर्षों से भूमिगत थे और केंद्रीय सैन्य आयोग के प्रभारी के साथ संगठन के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में भी कार्यरत थे। संग्राम 46 वर्षों से भूमिगत रहकर दंडकारण्य सहित कई जोनल समितियों का नेतृत्व कर चुके थे। दामोदर 28 वर्षों से सक्रिय रहे और जनवरी 2025 से तेलंगाना राज्य समिति के सचिव थे। गंगन्ना 36 वर्षों से संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे थे और पीएलजीए की पहली बटालियन में राजनीतिक सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। आत्मसमर्पण के कारणों की चर्चा डीजीपी ने बताया कि इन नेताओं ने 21 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी द्वारा की गई अपील से प्रेरित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ने का निर्णय लिया।

संगठन के भीतर वैचारिक मतभेद, आंतरिक कलह और जमीनी हकीकत से बढ़ती दूरी भी इस निर्णय के प्रमुख कारण बताए गए हैं। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत 90 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। देवुजी और संग्राम पर 25-25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दामोदर और गंगन्ना पर 20-20 लाख रुपये का इनाम था। कुल 90 लाख रुपये की राशि डिमांड ड्राफ्ट/चेक के माध्यम से प्रदान की गई है।

वर्ष 2024 से 2026 के बीच कुल 591 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके : डीजीपी

पुलिस ने आश्वासन दिया है कि पुनर्वास नीति के सभी लाभ उन्हें समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाएंगे। पुलिस के अनुसार वर्ष 2024 से 2026 के बीच कुल 591 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिनमें चार केंद्रीय समिति सदस्य और 16 राज्य समिति सदस्य शामिल हैं। वर्तमान में तेलंगाना मूल के केवल 11 भूमिगत माओवादी शेष हैं, जिनमें दो ही राज्य में सक्रिय हैं, जबकि अन्य छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में कार्यरत हैं। पुलिस महानिदेशक ने शेष भूमिगत माओवादियों से अपील दोहराते हुए कहा कि ‘हथियार छोड़ें’ भूमिगत जीवन त्यागें और मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आत्मसमर्पण करने वालों को राज्य सरकार की व्यापक पुनर्वास एवं पुनर्समावेशन योजना के तहत पूर्ण सुरक्षा, सहायता और सम्मानजनक जीवन के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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