केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में 270 वर्षों के बाद महाअनुष्ठान ‘महा कुंभाभिषेकम’ का आयोजन किया जा रहा है। यह अनुष्ठान मंदिर की शक्ति जागरण और पुनः प्रतिष्ठा के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। इससे पूर्व कई विशेष धार्मिक पूजाएं और अनुष्ठान सम्पन्न होंगे।
मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
मंदिर का इतिहास और संरचना
पद्मनाभस्वामी मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं द्वारा किया गया था। मंदिर में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है, जिसे देखने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है।
तिरुवनंतपुरम : सात रहस्यमयी तहखानों के लिए मशहूर देश के सबसे अमीर पद्मनाभस्वामी मंदिर 270 साल बाद ऐसा धार्मिक अनुष्ठान होने जा रहा है, जो दशकों में नहीं सदियों में होता है। मंदिर के प्रबंधक बी. श्रीकुमार ने बताया कि 8 जून को ‘महा कुंभाभिषेकम’ अनुष्ठान को मंदिर को पवित्र किया जाएगा।
‘महा कुंभाभिषेकम’से पहले होगी कई पूजा
बी. श्रीकुमार ने बताया कि ‘महा कुंभाभिषेकम’ से पहले भी आचार्य वरनम, प्रसाद शुद्धि, धारा, कलशम समेत कई पूजा होंगी। महा अनुष्ठान के दौरान नए ‘थज़िकाकुडम’ गर्भगृह के ऊपर तीन और ओट्टाक्कल मंडपम के ऊपर एक कलश की स्थापना होगी। विश्वक्सेना की मूर्ति को फिर से स्थापित किया जाएगा और तिरुवम्बाडी श्री कृष्ण मंदिर में ‘अष्टबंध कलशम’ होगा। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी रस्में ठीक से हों, ताकि मंदिर की पुरानी परंपरा बनी रहे। यह भगवान पद्मनाभ के भक्तों के लिए एक सुनहरा मौका है कि वे इतने सालों बाद इन पूजाओं को देख सकेंगे।
कुंभाभिषेकम से जागृत होगी मंदिर की शक्ति
बता दें कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में मरम्मत के लिए एक्सपर्ट पैनल बनाया था। मरम्मत का काम शुरू तो जल्दी हो गया था, लेकिन कोरोना की वजह से ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया। 2021 के बाद से अलग-अलग चरणों में मरम्मत का काम पूरा किया गया। मरम्मत के बाद मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए ‘महा कुंभाभिषेकम’ का आयोजन किया जा रहा है। इस अनुष्ठान का मकसद मंदिर की शक्ति को फिर से जगाना है। पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल की राजधानी के लिए तिरुवनंतपुरम के लिए बहुत खास है। शहर का नाम भी इस मंदिर से जुड़ा है। ‘थिरु’ ‘अनंत’ ‘पुरम’ का अर्थ है भगवान अनंत पद्मनाभ का पवित्र निवास। यहां मंदिर में भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर लेटे हैं। द्रविड़ शैली के इस प्राचीन मंदिर का मैनेजमेंट त्रावणकोर शाही परिवार के वंशजों की ओर से संचालित एक ट्रस्ट संभालता है।
छह तहखानों में 1.32 लाख करोड़ की दौलत
पद्मनाभ स्वामी मंदिर अपने अकूत खजाने और रहस्यमय तहखानों के लिए भी चर्चित रहा है। पहले तो खजाने का मालिकाना हक को लेकर त्रावणकोर शाही परिवार के वंशजों ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, फिर रहस्यमयी तहखानों को खोलने को लेकर मुकदमा चला। पूर्व आईपीएस अधिकारी टीपी सुंदरराजन की याचिका पर 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के रत्नभंडार के ऑडिट के लिए सात सदस्यों की कमेटी बनाई थी। जून तक छह तहखानों में 1 लाख 32 हजार करोड़ रुपये का खजाना मिला। वहां रखे रत्नों, सिंहासन, मूर्तियों और आभूषणों की इतनी बड़ी कीमत का अंदाजा किसी को नहीं था।