Kashi Vishwanath Temple : काशी विश्वनाथ मंदिर में बड़ा फैसला

Author Icon By Surekha Bhosle
Updated: December 24, 2025 • 12:03 PM
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नए साल पर स्पर्श दर्शन पर अस्थायी रोक

नए साल के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए (Kashi Vishwanath) काशी विश्वनाथ मंदिर में स्पर्श दर्शन बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया है।

6 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

साल के पहले दिन उमड़ेगी रिकॉर्ड भीड़- प्रशासन का अनुमान है कि नए साल पर करीब 6 लाख श्रद्धालु काशी विश्वनाथ धाम पहुंच सकते हैं। इसे देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में विशेष इंतजाम किए गए हैं

साल के आखिरी हफ्ते में तीर्थंयात्रियों और पर्यटकों का हुजूम काशी में उमड़ पड़ा है. रोज दो से ढाई लाख पर्यटक और श्रद्धालु काशी पहुंच रहे हैं. इस भीड़ को देखते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने बुधवार से स्पर्श दर्शन पर रोक लगा दी है. 24 दिसंबर से तीन जनवरी तक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में (sparsh darshan) स्पर्श दर्शन पर रोक रहेगी. एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि अभी से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो चुका है।

देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं. मंदिर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिग जैग लाइन व्यवस्था के माध्यम से श्रद्धालुओं को परिसर में भेजा जाएगा. रोज दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं. साल के आखिरी और नए साल के पहले दिन यानी कि 31 दिसंबर और एक जनवरी को श्रद्धालुओं की संख्या छह लाख तक पहुंचने की संभावना है।

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टूरिस्ट डेस्टिनेशन में टाॅप पर पहुंचा काशी

नए साल पर अब धूम धड़ाका की जगह ईश्वर के प्रति धन्यवाद और परिवार के कल्याण की कामना के लिए काशी विश्वनाथ आने की नई परम्परा बनी है. ऑल इंडिया टूरिस्ट फेडरेशन के कोऑर्डिनेटर एके सिंह ने बताया कि विशेष रूप से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर बनने के बाद से नए साल पर काशी आने वाले पर्यटकों की संख्या देश में किसी भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन की तुलना में सबसे ज्यादा है।

काशी ने 3 साल पहले तोड़ा गोवा का रिकाॅर्ड

आगरा और गोवा को वाराणसी ने तीन साल पहले ही पीछे छोड़ दिया है. दस साल पहले तक वेस्टर्न कांसेप्ट पर धूम धड़ाके के साथ कॉकटेल न्यू ईयर मनाने की एक परम्परा थी. लवर्स पॉइंट आगरा या बीच पॉइंट गोवा, दुबई और काठमांडू जाने का ट्रेंड था. लेकिन अब परिवार के कल्याण की कामना लिए, साल भर सुख-शांति और समृद्धि के लिए बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने की नई परम्परा बन गई है. आश्चर्य ये है कि सबसे ज्यादा ईयर एन्ड पर यूथ काशी आ रहे हैं।

काशी का इतिहास क्या है?

वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन निरंतर बसे शहरों में से एक है। इसका प्राचीन नाम काशी था, जो ईसा पूर्व पहली सहस्राब्दी में इसी नाम के एक राज्य से जुड़ा हुआ था । पास के सारनाथ में स्थित अशोक के सिंह स्तंभ को ईसा पूर्व पांचवीं शताब्दी में बुद्ध के पहले उपदेश की स्मृति में बनाया गया माना जाता है।

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