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Chhattisgarh : जहां नारायण करते हैं विश्राम, वहीं लगेगा कुंभ कल्प मेला

Surekha Bhosle
Surekha Bhosle
Chhattisgarh : जहां नारायण करते हैं विश्राम, वहीं लगेगा कुंभ कल्प मेला

छत्तीसगढ़ का पावन तीर्थ

छत्तीसगढ़ में स्थित यह तीर्थ स्थल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

  • मान्यता है कि यहां भगवान नारायण विश्राम करने आते हैं
  • इसी पवित्र भूमि पर अब कुंभ कल्प मेला आयोजित होने जा रहा है

कुंभ कल्प मेले की तैयारी

  • मेले को लेकर प्रशासन और धार्मिक समितियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं
  • देशभर से संत-महात्मा, साधु और श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे
  • धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन और स्नान का विशेष महत्व रहेगा

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद (Chhattisgarh ) जिले में 1 फरवरी से 15 फरवरी तक राजिम कुंभ कल्प मेले का आयोजन किया जाएगा. यहां पर वैसे ही कल्पवास किया जाता है, जैसे प्रयागराज के माघ मेले में होता है. मान्यता है कि भगवान विष्णु यहां के राजीव लोचन मंदिर में विश्राम करने के लिए आते हैं

छत्तीसगढ़ में 1 फरवरी से 15 फरवरी तक राजिम कुंभ कल्प (Kumbh Kalpa) मेला लगने वाला है, जिसकी तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं. इस मेले का आयोजन राज्य के गरियाबंद जिले में हर साल सालाना हिंदू तीर्थयात्रा के रूप में किया जाता है. मेले में हजारों की संख्या श्रद्धालु पहुंचते हैं. राजिम मेले में कल्पवास ठीक वैसे ही होता है, जैसे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हर साल लगने वाले माघ मेले में होता है. कहा जाता है कि यहीं से सृष्टि की शुरुआत हुई थी।

धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि अगर कोई चार धाम की यात्रा नहीं कर पाया है, तो राजिम मेले में आने से चारों धाम की यात्रा हो जाती है. यहां राजीव लोचन मंदिर की यात्रा को चारों धाम की यात्रा माना जाता है. यहां भगवान विष्णु चार रूपों में समर्पित हैं. इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग भी कहा जाता है।

यहां से हुई थी सृष्टि की रचना

मान्यता है कि सृष्टि की शुरूआत में भगवान विष्णु की नाभि से निकला कमल यहीं पर स्थित था और ब्रह्माजी ने यहीं से सृष्टि की रचना की थी. ऐसी मान्यता है कि राजीव लोचन मंदिर में भगवान विष्णु विश्राम करने आते हैं. यह भी मान्यता है कि दोपहर आरती में जो भोग लगाया जाता है. उसे भगवान विष्णु आकर ग्रहण भी करते हैं. कहा जाता है कि भोग की थाली पर भी उंगलियों के निशान देखे जाते हैं. हालांकि इस बात की कई बार जांच की भी गई, लेकिन रहस्य से पर्दा आज तक नहीं उठ सका।

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क्या है राजीव लोचन मंदिर की मान्यता?

राजीव लोचन मंदिर में भगवान विष्णु के सुबह बाल्यवास्था में, दोपहर के समय युवावस्था में और रात में वृद्धावस्था में दिखाई देते हैं. इस मंदिर का निर्माण करीब 9वीं सदी में किया गया था. मंदिर में बारह स्तंभ हैं, जिन पर अष्ठभुजा वाली दुर्गा, गंगा, यमुना और भगवान विष्णु के अवतार राम और नृसिंह भगवान के चित्र बने हैं. हर साल यहां माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि मेले का आयोजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जगन्नाथपुरी की यात्रा तब तक पूरी नहीं होती, जब तक राजिम मंदिर की यात्रा न हो।

शराब की दुकाने खुली रहेंगी या बंद?

इस बार तक शराब की दुकानों के बंद रहने का लेकर कोई आदेश नहीं जारी किया गया है. हर बार मेले के समय 15 दिनों तक स्थानीय प्रशासन शराब की दुकानों को बंद रखने का आदेश जारी करता है, जो अभी नहीं किया गया है. वहीं लोगों का कहना है कि मेले के दौरान शराब के साथ मांस की भी दुकाने बंद की जाएंं।

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