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Ganesh Chaturthi Special : गणेश जी के दो विवाह का रहस्य

Surekha Bhosle
Surekha Bhosle
Ganesh Chaturthi Special : गणेश जी के दो विवाह का रहस्य

पौराणिक कथा से जुड़ी अनसुनी कहानी

Ganesh Chaturthi : गणेश जी (Ganesh) के दो विवाह का प्रसंग हिन्दू धर्म की उन कथाओं में से है, जिसे कम लोग जानते हैं। यह कथा केवल उनकी शादी की नहीं, बल्कि एक श्राप और उसके प्रभाव की भी कहानी है।

ऋषि का श्राप बना कारण

एक बार गणेश जी ने एक देवता के वाहन पर बैठने की ज़िद कर दी। नाराज़ होकर एक ऋषि ने उन्हें श्राप दे दिया कि उनका विवाह नहीं होगा।

Ganesh Chaturthi Special, गणेश जी को भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में जाना जाता है। साथ ही गणेश जी प्रथम पूज्य देव भी कहलाते हैं, क्योंकि किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरूआत से पहले हमेशा गणेश जी का आह्वान किया जाता है। आज हम आपको गणेश जी के (Marriage) विवाह से जुड़ी कथा के बारे में बताने जा रहे हैं।

तुलसी जी ने दिया था गणेश जी को श्राप

पद्मपुराण और गणेश पुराण में कथा मिलती है कि एक बार तुलसी जी ने गणेश जी के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा। लेकिन गणेश जी ने उनसे विवाह करने से मना कर दिया। इससे तुलसी माता काफी क्रोधित हो गई और उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि उनके दो विवाह होंगे।

बदले में गणेश जी ने भी तुलसी जी को यह श्राप दिया कि उनका विवाह एक राक्षस से होगा। तुलसी जी के श्राप के चलते ही गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि नामक दो बहनों से हुआ।

अन्य देवी-देवताओं के विवाह में बाधा उत्पन्न करने लगे थे गणेश जी

गणेश पुराण के छठे अध्याय में भगवान गणेश के विवाह की कथा मिलती है, जिसके अनुसार, गणेश जी के लम्बोदर स्वरूप के कारण उनका विवाह नहीं हो रहा था। इससे नाराज होकर गणेश जी अन्य देवी-देवताओं के विवाह में बाधा उत्पन्न करने लगे।

इससे सभी देवता परेशान हो गए और उन्होंने अपनी समस्या ब्रह्मा जी से कही। ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं की बाद सुनी और अपनी दोनों पुत्रियों रिद्धि व सिद्धि को भगवान गणेश के पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा।

ब्रह्मा जी ने गणेश जी के समक्ष रखा विवाह का प्रस्ताव

Ganesh Chaturthi

जब भी गणेश जी को किसी देवता के विवाह की खबर मिलती, तो रिद्धि-सिद्धि उनका ध्यान भटका देती थीं, ताकि वह किसी के विवाह में विघ्न न उत्पन्न कर सकें। ऐसे में सभी देवताओं के विवाह बिना किसी बाधा के सम्पन्न होने लगे। जब यह बात गणेश जी को पता लगी, तो वह उन दोनों पर बहुत क्रोधित हो गए।

इस दौरान वहां ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उन्होंने गणेश जी को रिद्धि-सिद्धि से विवाह करने का प्रस्ताव दिया। गणेश जी ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया और उनका विवाह रिद्धि-सिद्धि के साथ सम्पन्न हुआ।

गणेश जी ने तुलसी जी को श्राप क्यों दिया?

जब गणेश जी ने तुलसी का प्रस्ताव ठुकराया तो तुलसी ने क्रोध में आकर उन्हें श्राप दे दिया कि उनका विवाह अवश्य होगा. इसके जवाब में गणेश जी ने भी तुलसी को श्राप दिया कि वह विवाह के लिए अनुपयुक्त होंगी और कभी भी उनकी पूजा में स्वीकार नहीं की जाएंगी।

भगवान गणेश को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती है?

गणेश जी ने क्षमा करते हुए कहा कि वह भविष्य में एक पवित्र पौधे के रूप में पूजनीय होंगी. भगवान विष्णु की प्रिय बनेंगी. साथ ही ये भी कहा कि जब उनकी पूजा होगी तब तुलसी का उपयोग वर्जित रहेगा. इसी वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी की पत्तियां नहीं चढ़ाई जातीं।

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