Nautapa : विज्ञान में ‘नौतपा’ शब्द नहीं, फिर भी क्यों पड़ती है 9 दिन भीषण गर्मी?

Author Icon By Surekha Bhosle
Updated: May 20, 2026 • 4:51 PM
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सूर्य और शुक्र की स्थिति से जुड़ा है पारंपरिक मान्यता का रहस्य

भारत में हर साल गर्मियों के दौरान “नौतपा” शब्द खूब चर्चा में रहता है। माना जाता है कि इस दौरान 9 दिनों तक तेज धूप और भीषण गर्मी पड़ती है। हालांकि विज्ञान में “नौतपा” (Nautapa) नाम का कोई आधिकारिक मौसम वैज्ञानिक शब्द नहीं है, लेकिन ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

क्या होता है नौतपा?

रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से शुरू होता है दौर- ज्योतिष मान्यता के अनुसार जब सूर्य (Rohini Nakshatra) में प्रवेश करता है, तब नौतपा की शुरुआत मानी जाती है। यह अवधि लगभग 9 दिनों तक रहती है, जिसमें धरती पर सूर्य की किरणें अधिक तीव्र महसूस होती हैं।

Nautapa 2026 Start Date: मई-जून की चिलचिलाती गर्मी के बीच हर साल एक ऐसा दौर आता है, जब धरती मानो आग उगलने लगती है. इस अवधि को भारतीय ज्योतिष और लोकमान्यताओं में नौतपा कहा जाता है. मान्यता है कि इन 9 दिनों में सूर्य देव का रौद्र रूप देखने को मिलता है और धरती आग के गोले की तरह तपने लगती है।

हालांकि आधुनिक मौसम विज्ञान में नौतपा शब्द के बारे में कोई जानकारी नहीं है. लेकिन इस दौरान तापमान में तेज बढ़ोतरी और लू चलने की स्थिति को वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं. वहीं ज्योतिष शास्त्र इस पूरे घटनाक्रम को सूर्य, शुक्र और रोहिणी नक्षत्र से जोड़कर देखता है. आइए जानते हैं साल 2026 में नौतपा कब से शुरू होगा और इन दिनों को सूर्य और शुक्र की शत्रुता से कैसे जोड़कर देखा जाता है।

कब से शुरू होगा नौतपा 2026?

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 25 मई 2026, सोमवार को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. सूर्य के इस गोचर के साथ ही नौतपा की शुरुआत मानी जाएगी. यह अवधि 2 जून 2026 तक चलेगी. भारतीय पारंपरिक मान्यताओं में नौतपा के 9 दिनों को सबसे गर्म दिनों में रखा जाता है।

आखिर क्या होता है नौतपा?

नौतपा दो शब्दों से मिलकर बना है नौ यानी 9 और तपा यानी तपन या गर्मी. इसका मतलब है लगातार नौ दिनों तक पड़ने वाली तेज गर्मी. ग्रामीण भारत में आज भी माना जाता है कि नौतपा के दौरान सूर्य की तपिश धरती को भीतर तक जितना गर्म करती है, बाद में उतनी ही अच्छी वर्षा का मौसम तैयार होता है।

ज्योतिष में क्यों खास है रोहिणी नक्षत्र?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि के दायरे में आता है. वृषभ राशि के स्वामी शुक्र देव माने जाते हैं, जबकि रोहिणी नक्षत्र के अधिपति चंद्रमा हैं. शुक्र और चंद्रमा दोनों को शीतलता, सौंदर्य और कोमलता का प्रतीक माना गया है. दूसरी ओर सूर्य अग्नि, तेज और उग्र ऊर्जा के कारक माने जाते हैं. ज्योतिषीय मान्यता कहती है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उनकी प्रचंड ऊर्जा शुक्र और चंद्रमा के शीतल प्रभाव पर भारी पड़ जाती है. इसी कारण वातावरण में बहुत ज्यादा गर्मी बढ़ती है।

सूर्य और शुक्र की शत्रुता से नौतपा का कनेक्शन

ज्योतिष में सूर्य और शुक्र को आपस में विरोधी ग्रह माना गया है. सूर्य जहां तप, अनुशासन और तेज का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं शुक्र सुख, शीतलता और भोग-विलास के कारक माने जाते हैं. मान्यता है कि जब सूर्य शुक्र के प्रभाव वाले क्षेत्र यानी रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो दोनों ग्रहों की ऊर्जा के बीच टकराव जैसी स्थिति बनती है. ज्योतिषीय दृष्टिकोण के अनुसार, इस समय सूर्य की गर्मी इतनी अधिक हो जाती है कि वातावरण का संतुलन बिगड़ने लगता है और धरती पर प्रचंड गर्मी महसूस होती है.

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विज्ञान नौतपा को कैसे देखता है?

मौसम विज्ञान नौतपा, शत्रुता या ग्रहों के प्रभाव जैसी अवधारणाओं को वैज्ञानिक आधार पर स्वीकार नहीं करता. लेकिन वैज्ञानिक यह मानते हैं कि मई के आखिरी सप्ताह और जून की शुरुआत में उत्तर भारत समेत कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसके पीछे मुख्य कारण पृथ्वी की स्थिति, सूर्य की सीधी किरणें और गर्म हवाएं होती हैं. इस समय सूर्य की किरणें भारतीय उपमहाद्वीप पर लगभग सीधी पड़ती हैं, जिससे जमीन तेजी से गर्म होती है. इन्हीं कारणों से लू और तेज गर्मी की स्थिति बनती है।

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