होली का त्योहार रंग, गुलाल और खुशियों के साथ मनाया जाता है. लेकिन उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिला में स्थित दो गांव खुरजान और क्विली ऐसे हैं जहां पिछले 150 से अधिक सालों से होली नहीं खेली जाती. यहां के लोग न तो रंग लगाते हैं और न ही ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाते हैं. इसके पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता और पुरानी लोककथा जुड़ी हुई है।
Religious Beliefs Uttarakhand: देशभर में जहां फागुन का महीना आते ही होली की खुमारी छाने लगती है, लोग रंगों और गुलाल में सराबोर नजर आते हैं, वहीं उत्तराखंड के (Rudraprayag) रुद्रप्रयाग जिले में दो गांव ऐसे भी हैं जहां डेढ़ सदी से सन्नाटा पसरा है. रुद्रप्रयाग के खुरजान और क्विली गांव में होली का त्योहार नहीं मनाया जाता. हैरानी की बात यह है कि यहां के लोग न तो एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और न ही पकवानों का आनंद लेते हैं. आखिर क्या है इसके पीछे की वजह, आइए जानते हैं।
इष्टदेवी की नाराजगी का डर
ग्रामीणों की मान्यता है कि उनकी इष्टदेवी मां त्रिपुरा सुंदरी (Mother Tripura Sundari) को शोर-शराबा, हुड़दंग और चमकीले रंग पसंद नहीं हैं. गांव के लोगों का विश्वास है कि यदि वे होली खेलेंगे तो देवी की शांति भंग होगी और इसका दुष्परिणाम पूरे गांव को भुगतना पड़ सकता है. इसी कारण यहां के लोग सादगी और शांति के साथ सामान्य दिन की तरह समय बिताते हैं. वे देवी की पूजा-अर्चना तो करते हैं, लेकिन रंगों का प्रयोग नहीं करते हैं।
महामारी के बाद बदली परंपरा
स्थानीय कहानियों के अनुसार, लगभग 150 से 300 साल पहले गांव के लोगों ने होली खेलने की कोशिश की थी. इसके कुछ ही समय बाद गांव में हैजा जैसी भयंकर महामारी फैल गई. कई लोगों की जान चली गई. ग्रामीणों ने इस घटना को दैवीय प्रकोप माना और यह मान लिया कि देवी होली के शोर-शराबे से नाराज हो गई थीं. तभी से गांव में होली खेलने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई. तब से आज तक यह परंपरा चली आ रही है।
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आज भी निभाई जा रही है परंपरा
भले ही समय बदल गया हो और आसपास के इलाकों में धूमधाम से होली मनाई जाती हो, लेकिन खुरजान और क्विली के लोग आज भी अपनी परंपरा का पालन करते हैं. नई पीढ़ी भी बड़ों की इस मान्यता का सम्मान करती है. गांव में होली के दिन खास पूजा की जाती है और शांति बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।
ग्रामीणों का मानना है कि देवी की कृपा से ही उनका गांव सुरक्षित और खुशहाल है. यह परंपरा बताती है कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में त्योहारों को लेकर अपनी-अपनी मान्यताएं और परंपराएं हैं. जहां एक ओर देशभर में होली रंगों और उत्साह का प्रतीक है, वहीं उत्तराखंड के इन गांवों में यह दिन आस्था, श्रद्धा और अनुशासन का प्रतीक बन गया है।
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