Murshidabad Violence: मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद यूसुफ पठान की गैर -मौजूदगी से टीएमसी में नाराजगी

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यूसुफ पठान पश्चिम बंगाल की बहरमपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। हाल ही में राज्य के मुर्शिदाबाद ज़िले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में भड़की हिंसा ने कई इलाकों में तनाव और विस्थापन की स्थिति पैदा कर दी।

कोलकाता हाई कोर्ट ने हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है, वहीं राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने वाले हैं। लेकिन इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान खींची बहरमपुर के टीएमसी सांसद और क्रिकेटर से नेता बने यूसुफ पठान की चुप्पी और अनुपस्थिति ने।

मुर्शिदाबाद ज़िले में तीन लोकसभा सीटें हैं – जंगीपुर, मुर्शिदाबाद और बहरमपुर, जिनका प्रतिनिधित्व क्रमशः खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान और यूसुफ पठान करते हैं।

हालांकि यूसुफ पठान के बहरमपुर क्षेत्र में सीधा हिंसा नहीं हुई, लेकिन वह प्रभावित क्षेत्रों के नज़दीक है। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी से न सिर्फ विपक्ष, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर भी नाराज़गी है।

अब तक मुर्शिदाबाद हिंसा के सिलसिले में 270 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

यूसुफ पठान के साथी TMC नेताओं की प्रतिक्रिया:

अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद सांसद) ने The Indian Express से कहा:
“यूसुफ पठान राजनीति में नए हैं और बाहर से आए हैं। उन्होंने अभी तक दूरी बनाए रखी है। लेकिन इससे जनता में गलत संदेश जाता है। जब हमारे सांसद, विधायक और बूथ कार्यकर्ता मैदान में हैं, तो उन्हें भी होना चाहिए था।”

उन्होंने आगे कहा:
“मैं शांति बैठक के लिए 100 किमी दूर शमशेरगंज गया। खलीलुर रहमान और कई TMC विधायक वहां मौजूद थे। लेकिन यूसुफ पठान नहीं आए। यह नहीं कहा जा सकता कि यह मेरा क्षेत्र नहीं है, इसलिए मैं नहीं जाऊंगा।”

भारतपुर के TMC विधायक हुमायूं कबीर ने भी यूसुफ पठान पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा:
“वो गुजरात में रहते हैं और राजनीति को हल्के में ले रहे हैं। जनता ने उन्हें वोट देकर चुना, लेकिन अब वह मतदाताओं के साथ खेल रहे हैं। अगर उनका रवैया नहीं बदला, तो मैं पार्टी नेतृत्व से कहूंगा कि अगली बार उन्हें टिकट न दिया जाए।”

सोशल मीडिया पर “चाय” पोस्ट से विवाद

हिंसा के ठीक बाद यूसुफ पठान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें वे चाय पीते और आराम करते हुए नजर आ रहे हैं। कैप्शन था:
“आरामदायक दोपहर, अच्छी चाय, और शांत वातावरण। बस पल को जी रहा हूं।”

इस पोस्ट को लेकर जनता और विपक्ष ने उन्हें संवेदनहीन’ और असंवेदनशील बताया। पोस्ट उस दिन आई जब मुर्शिदाबाद में हिंसा में तीन की मौत और सैकड़ों घायल हो चुके थे।

इसके बाद उन्होंने सिर्फ बंगाली नववर्ष की शुभकामना और अपने बेटे के जन्मदिन की पोस्ट की, लेकिन हिंसा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और न ही प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।

digital@vaartha.com

लेखक परिचय

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