मंत्री ने एससी हॉस्टल का दौरा किया
हैदराबाद। दलित छात्रों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट अवसर प्रदान करना राज्य सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। यह बात राज्य के एससी, एसटी कल्याण मंत्री ए. लक्ष्मण कुमार (A. Laxman Kumar) ने कही। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली दलित विद्यार्थियों को सभी क्षेत्रों में समान अवसर दिलाने का एकमात्र माध्यम शिक्षा है। मंत्री ने बताया कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में सरकार दलितों को कॉरपोरेट स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
एससी विद्यार्थियों को सिविल सेवा, ग्रुप-1 और ग्रुप-2 परीक्षाओं के लिए सर्वोत्तम कोचिंग देना सरकार की प्राथमिकता है। ‘दिल्ली स्तर की सिविल्स कोचिंग अब हैदराबाद में ही उपलब्ध कराई जाएगी।’ बुधवार को 59 दलित जाति संघों के नेताओं ने हैदराबाद के अंबेडकर भवन तथा काचीगुड़ा स्थित एससी हॉस्टल (SC Hostel) का दौरा किया। इस अवसर पर मंत्री ने घोषणा की कि लोअर टैंकबंड स्थित अंबेडकर भवन को आधुनिक कोचिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
सिविल सेवा कोचिंग के लिए दिल्ली जाना अत्यधिक खर्चीला
वहीं काचीगुड़ा हॉस्टल परिसर को रेजिडेंशियल अकादमिक सेंटर में परिवर्तित करने की योजना तैयार की जा रही है। मंत्री ने कहा कि अब तक तेलंगाना के छात्रों को सिविल सेवा कोचिंग के लिए दिल्ली जाना पड़ता था, जो अत्यधिक खर्चीला है। इस स्थिति को बदलने के लिए हैदराबाद में ही उच्च स्तरीय कोचिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। आने वाले समय में डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम, अनुभवी फैकल्टी, सेवानिवृत्त सिविल सेवकों के गेस्ट लेक्चर, मॉक टेस्ट, इंटरव्यू गाइडेंस और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही आवास, मेस और अध्ययन कक्ष जैसी समुचित सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
अपनाई जाएगी मेरिट आधारित पारदर्शी चयन प्रक्रिया
सिविल सेवा तथा ग्रुप-1 और ग्रुप-2 कोचिंग के लिए मेरिट आधारित पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मंत्री ने बताया कि कोचिंग केंद्रों को केवल हैदराबाद तक सीमित न रखकर भविष्य में राज्य के प्रत्येक जिले तक विस्तारित करने की दीर्घकालिक योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि एससी युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे। कोचिंग केंद्रों को अकादमिक उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा तथा तमिलनाडु मॉडल की तर्ज पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। कार्यक्रम में एमएलसी अद्दांकी दयाकर, पूर्व मंत्री मोlकुपल्ली नरसिम्हुलु सहित विभिन्न दलित संगठनों के नेता उपस्थित थे।
उच्च शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
स्कूल स्तर की पढ़ाई (जैसे 12वीं) के बाद विश्वविद्यालय या कॉलेज में प्राप्त की जाने वाली पढ़ाई को उच्च शिक्षा कहा जाता है। इसमें स्नातक, स्नातकोत्तर, शोध और पेशेवर पाठ्यक्रम शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विशिष्ट ज्ञान, कौशल और अनुसंधान क्षमता विकसित करना होता है। यह व्यक्ति को करियर निर्माण, विशेषज्ञता और सामाजिक नेतृत्व के लिए तैयार करती है।
उच्च शिक्षा के संस्थापक कौन थे?
इसका कोई एक संस्थापक नहीं है, क्योंकि उन्नत शिक्षा की परंपरा प्राचीन काल से विकसित होती रही है। भारत में नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला विश्वविद्यालय जैसे प्राचीन संस्थान उच्च अध्ययन के प्रमुख केंद्र थे। आधुनिक विश्वविद्यालय प्रणाली 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित हुई, जब कलकत्ता, बंबई और मद्रास विश्वविद्यालय शुरू किए गए।
उच्च शिक्षा क्या है?
माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद विशेष विषयों में गहन अध्ययन की प्रक्रिया को उच्च शिक्षा कहा जाता है। इसमें डिग्री, डिप्लोमा और शोध कार्यक्रम शामिल होते हैं। इसका मुख्य लक्ष्य ज्ञान का विस्तार, अनुसंधान को बढ़ावा देना और पेशेवर दक्षता विकसित करना है। यह किसी भी देश की आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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