भाजपा किसी अन्य पार्टी को समर्थन नहीं देगी
हैदराबाद। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तेलंगाना राज्याध्यक्ष एन. रामचन्द्र राव (N Ramchandra Rao) ने पार्टी कार्यालय में आयोजित मीडिया बैठक में कहा कि 116 नगरपालिकाओं और 7 नगर निगमों में हुए 2026 के नगरपालिका चुनावों में अब तक भाजपा ने लगभग 250 से अधिक वार्डों में जीत हासिल की है और लगभग 6 नगरपालिकाओं में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी निज़ामाबाद और करीमनगर नगर निगमों को पहली बार अपने कब्जे में लेने की दिशा में अग्रसर है। रामचन्द्र राव ने कहा कि चुनावों में लगभग 70 डिवीजनों में भाजपा उम्मीदवारों को जीत की स्थिति में देखा जा रहा है, और कुल मिलाकर कुल मिलाकर 320 से 350 सीटों पर भाजपा जीत की ओर बढ़ रही है।
पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन होने का किया दावा
उन्होंने विशेष रूप से मंचिर्याल, रामगुंडम और नल्लागोंडा जैसे इलाकों में पार्टी की स्थितियों में पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन होने का दावा किया। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने अपना मेनिफेस्टो जारी किया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार से कैसे फंड प्राप्त होंगे और नगरपालिकाओं का कैसे विकास किया जाएगा, साथ ही राज्य सरकार की विफलताओं, भ्रष्टाचार और जनता के साथ किए गए अन्यायों पर भी चार्ज-शीट पेश की गई। राव ने कहा कि लगभग 200 वार्डों में भाजपा के उम्मीदवार मामूली अंतर से हार गए, लेकिन त्रिमुखी मुकाबले के कारण पार्टी को कुछ नुकसान झेलना पड़ा।
स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ता पक्षों को मिलता है लाभ
उन्होंने यह भी बताया कि उन जिलों में जहाँ पहले भाजपा का कोई पंजीकृत प्रतिनिधित्व नहीं था, वहाँ भी पार्टी ने जीत दर्ज की है, जैसे भद्राद्री–कोत्तागुडेम जिले के अश्वारावुपेट वार्ड में और कोत्तागुडेम निगम के एक डिवीजन में। रामचन्द्र राव ने कहा कि पारंपरिक रूप से स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ता पक्षों को लाभ मिलता है। रामचन्द्र राव ने बताया कि भाजपा आदिलाबाद, खानापुर और बाइमसा जैसे क्षेत्रों में चैरमैन पद भी जीतने की संभावना रखती है, और स्थानीय निकायों में भाजपा किसी अन्य पार्टी को समर्थन नहीं देगी।
हैदराबाद में मुस्लिम आबादी कितनी है?
शहर की कुल जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 43 से 44 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। यह अनुपात विशेष रूप से पुराने शहर के क्षेत्रों में अधिक दिखाई देता है। ऐतिहासिक रूप से निज़ाम शासन और दक्खिनी संस्कृति के कारण इस समुदाय का सामाजिक व सांस्कृतिक प्रभाव काफी मजबूत रहा है। अन्य धर्मों में हिंदू बहुसंख्यक हैं, जबकि ईसाई, जैन और सिख समुदाय भी यहाँ निवास करते हैं।
हैदराबाद का पुराना नाम क्या था?
इतिहास के अनुसार, इस नगर को प्रारंभ में भाग्यनगर कहा जाता था। बाद में कुतुब शाही शासकों के काल में इसका नाम बदलकर वर्तमान नाम रखा गया। 1591 में मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने इसकी स्थापना की थी। समय के साथ यह दक्षिण भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र बन गया तथा निज़ाम शासन में इसकी पहचान और मजबूत हुई।
हैदराबाद की फेमस क्या है?
चारमीनार, गोलकोंडा किला और हुसैन सागर झील जैसे ऐतिहासिक स्थल यहाँ की पहचान हैं। सालारजंग संग्रहालय और रामोजी फिल्म सिटी भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। खानपान में बिरयानी, हलीम और इरानी चाय विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। मोतियों के आभूषण और पारंपरिक बाजार, खासकर लाड़ बाजार, खरीदारी के लिए जाने जाते हैं। सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक आईटी उद्योग भी इसकी खास पहचान बन चुके हैं।
हैदराबाद में कौन सी भाषा बोली जाती है?
यहाँ की दैनिक बातचीत में तेलुगु और उर्दू प्रमुख रूप से सुनाई देती हैं। सरकारी कार्यों और शिक्षा में हिंदी तथा अंग्रेजी का भी व्यापक उपयोग होता है। स्थानीय स्तर पर दक्खिनी या हैदराबादी उर्दू एक विशिष्ट शैली में बोली जाती है, जो शहर की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। बहुभाषी वातावरण के कारण अलग-अलग समुदाय आपसी संवाद में आसानी महसूस करते हैं।
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