हैदराबाद। भारत की ओर प्रवेश द्वार रविवार को लोकसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Union Finance Minister Nirmala Sitharaman) द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 (Union Budget 2026-27) को सामाजिक वैज्ञानिक और तेलंगाना पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वकुलाभरणम कृष्ण मोहन राव ने सामाजिक न्याय का ठोस उदाहरण बताया है।
डॉ. राव ने कहा कि यह बजट कल्याण को अलग–अलग योजनाओं के रूप में देखने के बजाय समग्र सामाजिक सुधार के ढांचे में स्थापित करता है। किसानों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों, महिलाओं, युवाओं, घुमंतू जातियों–समुदायों और गरीब वर्गों तक विकास का लाभ पहुँचाने का संकल्प बजट की नीति संरचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
समान अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक कदम
उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, स्वास्थ्य और स्वरोजगार को सामाजिक न्याय के प्रभावी साधनों के रूप में प्रस्तुत करना इस बजट की प्रमुख विशेषता है। उच्च शिक्षा में बालिकाओं के लिए प्रत्येक जिले में छात्रावास स्थापित करने का निर्णय सामाजिक–आर्थिक बाधाओं को कम करते हुए समान अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक कदम है।
डॉ. राव के अनुसार, छोटे व्यवसायों, स्वरोजगार, पारंपरिक पेशों, पशुपालन, मत्स्य पालन, सेवा क्षेत्रों और स्थानीय उद्यमिता पर दिया गया जोर समावेशी भागीदारी वाले विकास मॉडल को मजबूत करता है। यह दृष्टिकोण समाज के विभिन्न वर्गों को अलग–थलग करने के बजाय उन्हें विकास की मुख्यधारा में सहभागी बनाता है।
2025 से 2026 के लिए केंद्रीय बजट क्या है?
भारत सरकार का केंद्रीय बजट 2025–26 उस वित्तीय वर्ष की आर्थिक रूपरेखा है जो 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहती है। इसमें सरकार की आय, खर्च, कर नीतियाँ और विकास प्राथमिकताएँ तय की जाती हैं। बजट में आम तौर पर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा, सामाजिक कल्याण और रोजगार पर ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, महंगाई नियंत्रित रखना और समाज के कमजोर वर्गों को राहत देना होता है।
2025 से 2026 के लिए बजट क्या है?
असल में, बजट 2025–26 भारत की आर्थिक योजना का आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे केंद्र सरकार संसद में प्रस्तुत करती है। यह बताता है कि सरकार अगले एक साल में पैसा कहाँ से जुटाएगी और किन क्षेत्रों में खर्च करेगी। इसमें टैक्स से जुड़े प्रस्ताव, सब्सिडी, योजनाएँ और नीतिगत सुधार शामिल रहते हैं। बजट का मुख्य लक्ष्य राजकोषीय संतुलन बनाए रखते हुए विकास, निवेश और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना होता है।