हैदराबाद। तेलंगाना भाजपा ने गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Chief Minister A. Revanth Reddy) द्वारा केरल में हाल ही में आयोजित चुनावी रैली में दिए गए ‘असंवेदनशील और अपरिपक्व’ बयान पर कड़ा आपत्ति जताई। भाजपा के राज्य मुख्य प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी एन. वी. सुभाष ने बताया कि मुख्यमंत्री के बयान, जिसमें उन्होंने पिनराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘भाई’ के रूप में की और राज्य की समस्याओं का दोष उन्हें दिया, तथ्यों के विरुद्ध होने के साथ-साथ संवैधानिक पद धारण करने वाले नेता के लिए अनुचित हैं। सुभाष ने कहा कि इस तरह के बयानों से राजनीतिक अपरिपक्वता और मुख्यमंत्री पद की गरिमा के प्रति उपेक्षा झलकती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि चुनावी प्रचार के दौरान सार्वजनिक विमर्श तथ्यों, जवाबदेही और रचनात्मक आलोचना (constructive criticism) पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल सस्ता प्रचार पाने के लिए नाटकीय बयानबाजी तक सीमित।
भाजपा ने तेलंगाना सीएम ए. रेवंत रेड्डी के बेतुके बयान की निंदा की
प्रवक्ता ने याद दिलाया कि भारत और केरल की राजनीतिक रूपरेखा दशकों की शासन व्यवस्था और कांग्रेस व कम्युनिस्ट पार्टियों की नीतियों से गढ़ी गई है। मुख्यमंत्री द्वारा दोष को सुविधाजनक तरीके से स्थानांतरित करना और इस ऐतिहासिक वास्तविकता की अनदेखी करना केवल राजनीतिक अवसरवाद को उजागर करता है। सुभाष ने रेवंत रेड्डी के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत तेलुगु देशम पार्टी से की थी और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। ऐसे बदलावों से विचारधारात्मक स्थिरता पर सवाल उठते हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस की लंबी चालाकी पर भी ध्यान दिलाया, जो राष्ट्रीय स्तर पर लेफ्ट पार्टियों के साथ गठबंधन बनाए रखते हुए केरल में विरोधी होने का ढोंग करती रही है। उन्होंने कहा कि यूडीएफ और एलडीएफ के बीच कथित मुकाबले ने वर्षों में राज्य के विकास के रास्ते को मूलतः बदलने में बहुत कम योगदान दिया है।
महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दों को तुच्छ कर देते हैं इस तरह के बयान
सुभाष ने चेताया कि अवसरवादी बदलाव और आक्रामक रुख जनता के नेतृत्व पर विश्वास कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा, ‘ऐसे समय में जब मतदाता गंभीरता और समाधान की उम्मीद रखते हैं, इस तरह के बयान महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दों को तुच्छ कर देते हैं और राजनीतिक बहस के मानक को घटाते हैं।’ उन्होंने नेताओं से आग्रह किया कि वे पक्षपातपूर्ण नाटकों से ऊपर उठें और मतदाताओं के साथ जिम्मेदारी से संवाद करें, दूरदर्शिता और जवाबदेही पेश करें। सुभाष ने कहा, ‘पद में बैठे लोगों के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की पवित्रता बनाए रखना और पद के गरिमामय आचरण का पालन करना आवश्यक है। लापरवाह बयान अल्पकालिक राजनीतिक लक्ष्य पूरा कर सकते हैं, लेकिन यह अंततः सार्वजनिक जीवन और लोकतांत्रिक विमर्श की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है।’
तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?
इस राज्य का कोई आधिकारिक दूसरा नाम नहीं है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से इसे “तेलंगाना क्षेत्र” के नाम से जाना जाता रहा है। यह क्षेत्र पहले आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 से पहले संयुक्त आंध्र प्रदेश का हिस्सा था। अलग राज्य बनने के बाद “तेलंगाना” नाम ही आधिकारिक और प्रचलित है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
यहां का भोजन मसालेदार और स्वादिष्ट होता है। हैदराबादी बिरयानी सबसे प्रसिद्ध व्यंजन है, जो हैदराबाद की पहचान मानी जाती है। इसके अलावा ज्वार की रोटी, सरवा पिंडी, पचड़ी (चटनी) और विभिन्न प्रकार के मांसाहारी व्यंजन भी यहां के लोकप्रिय भोजन में शामिल हैं।
तेलंगाना राज्य का गठन कब हुआ था?
यह राज्य 2 जून 2014 को बना था। तेलंगाना का गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 के तहत हुआ, जब आंध्र प्रदेश को विभाजित कर अलग राज्य बनाया गया। इस दिन को हर साल तेलंगाना स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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