करीमनगर । धान क्रय केंद्रों पर भारी कठिनाइयों का सामना करने के बाद आखिरकार अपनी फसल बेचने में कामयाब रहे धान किसानों के सामने अब अगली दुविधा यह है कि राज्य सरकार उन्हें अच्छी किस्म के धान के लिए वादे के अनुसार 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस कब देगी। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश के बाद किसान अपनी फसल को बचाने की कोशिश में मुश्किल में पड़ गए हैं। फसल काटने के बाद भी कई खरीद केंद्रों पर बारिश के पानी में धान भीगने के कई मामले सामने आए हैं। हालांकि, खरीद के बाद भी उनकी परेशानी खत्म नहीं हुई है। अब उन्हें 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस के लिए अंतहीन इंतजार करना पड़ रहा है।
कांग्रेस सरकार ने बोनस देने का किया था वादा
यहां के कई किसानों ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ-साथ यह राशि अभी तक उनके बैंक खातों में जमा नहीं हुई है। कांग्रेस सरकार ने सभी धान की किस्मों पर 500 रुपये का बोनस देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसने अपना रुख बदल दिया और बोनस को केवल बढ़िया किस्मों तक सीमित कर दिया। लेकिन अब वह भी एक खोखला वादा ही लगता है। पिछले वनकालम सीजन में किसानों को बोनस के लिए तीन महीने तक इंतजार करना पड़ा था। न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ बोनस देने की बजाय किसानों के बैंक खातों में सिर्फ 2320 रुपए एमएसपी जमा किया जा रहा है।
20 दिनों से बोनस का बेसब्री से इंतजार कर रहे किसान
बोनस का भुगतान कुछ महीनों बाद किया जाता है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। इस सीजन में अब तक किसानों से 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद हो चुकी है। 490 करोड़ रुपए के मुकाबले 370 करोड़ रुपए एमएसपी का भुगतान किया गया। 2 लाख मीट्रिक टन में से 23 हजार मीट्रिक टन बढ़िया किस्म का है। 53.36 करोड़ रुपए एमएसपी की राशि जमा की गई, लेकिन 11.50 करोड़ रुपए Bonus का भुगतान नहीं किया गया। पिछले 20 दिनों से बोनस का बेसब्री से इंतजार कर रहे किसान सरकार से अविलंब भुगतान की मांग कर रहे हैं।
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