तेहरान । ठीक 15 साल पहले, 9 जनवरी 2011 को ईरान के विमानन इतिहास में एक ऐसी त्रासदी घटी, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। तेहरान से उर्मिया जा रही ईरान एयर (IRAN AIR) की फ्लाइट 277 एक भयावह हादसे का शिकार हो गई थी। आज इस हादसे की 15वीं बरसी पर उन 78 लोगों को याद किया जा रहा है, जिन्होंने उस काली शाम अपनी जान गंवाई थी।
खराब मौसम बना काल
घटना वाले दिन तेहरान के मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Mehrabad International Airport) पर मौसम बेहद खराब था। इसी कारण फ्लाइट अपने निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से शाम 6:15 बजे रवाना हुई। उस वक्त किसी को अंदेशा नहीं था कि मौसम की यह अनिश्चितता एक बड़े हादसे का रूप ले लेगी।
35 साल पुराना बोइंग 727
जिस बोइंग 727 विमान से यह उड़ान भरी गई थी, वह करीब 35 साल पुराना था। इस विमान का इतिहास भी काफी चुनौतीपूर्ण रहा था। यह लंबे समय तक इराक में जब्त रहा और कबाड़ जैसी स्थिति में पड़ा रहा, बाद में मरम्मत के बाद इसे दोबारा सेवा में लाया गया।
लैंडिंग के दौरान बिगड़े हालात
विमान की कमान एक बेहद अनुभवी पायलट के हाथों में थी, लेकिन उर्मिया एयरपोर्ट (Urmiya Airport) के नजदीक पहुंचते ही परिस्थितियां बेकाबू हो गईं। भारी बर्फबारी और बेहद कम दृश्यता के कारण रनवे दिखाई नहीं दे रहा था।
सीवियर आइसिंग जोन में फंसा विमान
कई असफल लैंडिंग प्रयासों के बाद पायलट ने विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाने का फैसला किया। इसी दौरान विमान एक खतरनाक सीवियर आइसिंग जोन में फंस गया। पंखों और इंजनों पर तेजी से बर्फ जमने लगी, जिससे इंजन की ताकत और एयरफ्लो प्रभावित हुआ।
टकराते ही चकनाचूर हुआ विमान
क्रू ने इंजनों को दोबारा चालू करने की पूरी कोशिश की, लेकिन विमान संतुलन खो बैठा और उर्मिया एयरपोर्ट से लगभग 15 किलोमीटर दूर जमीन से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि विमान कई टुकड़ों में बिखर गया।
105 में से 78 लोगों की मौत
इस विमान में कुल 105 लोग सवार थे, जिनमें से 78 की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में चालक दल के सभी सदस्य शामिल थे। वहीं 27 यात्री चमत्कारिक रूप से जीवित बच गए, हालांकि वे गंभीर रूप से घायल थे।
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हादसे से मिला बड़ा सबक
बाद की जांच में सामने आया कि इंजनों पर बर्फ जमना और उस स्थिति में इंजन प्रबंधन की विफलता ही इस भीषण हादसे का मुख्य कारण बनी। 15 साल बाद भी यह दुर्घटना पुराने विमानों के रखरखाव और खराब मौसम में उड़ान के जोखिमों को लेकर एक कड़ा सबक बनी हुई है।
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