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America: अमेरिका-ईरान तनाव

Dhanarekha
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America: अमेरिका-ईरान तनाव

युद्ध की आहट के बीच नागरिकों को देश छोड़ने का अल्टीमेटम

वाशिंगटन: अमेरिका(America) के वर्चुअल दूतावास ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। एम्बेसी ने स्पष्ट किया है कि ईरान में सुरक्षा स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है, सड़कें बंद हैं और इंटरनेट ब्लैकआउट की आशंका है। नागरिकों से कहा गया है कि वे अमेरिकी सरकार की आधिकारिक सहायता का इंतज़ार किए बिना तुरंत देश छोड़ने का अपना प्लान खुद बनाएं। विशेष रूप से दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) वाले लोगों को आगाह किया गया है कि ईरान उन्हें केवल ईरानी नागरिक मानता है, जिससे उनकी गिरफ्तारी या लंबी हिरासत का जोखिम कहीं अधिक है

ओमान में परमाणु वार्ता: कूटनीति का आखिरी मौका?

मस्कट (ओमान) में आज से अमेरिका(America) और ईरान के बीच नौ महीनों के लंबे अंतराल के बाद औपचारिक परमाणु वार्ता शुरू हो रही है। इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची, राष्ट्रपति ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जैरेड कुशनेर से मुलाकात करेंगे। अमेरिका ने समझौते के लिए चार कड़ी शर्तें रखी हैं, जिनमें यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पर पूर्ण प्रतिबंध और लंबी दूरी की मिसाइलों को सीमित करना शामिल है। हालांकि, ईरान केवल परमाणु मुद्दे पर बात करना चाहता है, जबकि अमेरिका उसके मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय प्रभाव को भी चर्चा में शामिल करने पर अड़ा है।

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सैन्य घेराबंदी और ‘जीरो परमाणु क्षमता’ की मांग

व्हाइट हाउस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो ‘ताकत का इस्तेमाल’ एक सक्रिय विकल्प है। अमेरिकी(America) सेंट्रल कमांड ने अरब सागर में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन की तैनाती की पुष्टि की है। इसके साथ ही मिडिल ईस्ट के कई देशों में अमेरिकी वायुसेना हाई अलर्ट पर है। अमेरिका की सीधी मांग है कि ईरान के पास ‘जीरो परमाणु क्षमता’ होनी चाहिए। दूसरी तरफ, बातचीत से ठीक पहले ईरान द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती ने संकेत दे दिया है कि वह दबाव में झुकने को तैयार नहीं है।

अमेरिका ने ईरान के साथ समझौते के लिए कौन सी प्रमुख शर्तें रखी हैं?

अमेरिका(America) ने 4 मुख्य शर्तें रखी हैं: यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण प्रतिबंध, संवर्धित यूरेनियम को हटाना, मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करना और क्षेत्रीय प्रॉक्सी बलों को मदद बंद करना।

ईरान में फंसे अमेरिकी नागरिकों के लिए स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण क्यों है?

क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच सीधे कूटनीतिक संबंध नहीं हैं (स्विट्जरलैंड वहां अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व करता है), और दोहरी नागरिकता वाले लोगों को ईरानी कानून के तहत सुरक्षा मिलना मुश्किल है।

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