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Nepal : भारत के अलावा नेपाल में भी रही गणेश चतुर्थी की धूम

Surekha Bhosle
Surekha Bhosle
Nepal : भारत के अलावा नेपाल में भी रही गणेश चतुर्थी की धूम

काठमांडूः भारत के अलावा पड़ोसी देश नेपाल (Nepal) में भी बुधवार को हिंदुओं ने धूमधाम से गणेश चतुर्थी की त्योहार मनाया। भक्तों ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करके बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ गणेश चतुर्थी मनाई। विघ्नहर्ता भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का देवता माना जाता है। भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह पावन त्योहार नेपाल के विभिन्न मंदिरों में विशेष उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया

मंदिरों में रही धूम काठमांडू के

काठमांडू के प्रमुख गणेश मंदिरों (Ganesh Temples) में कमलादि गणेश, अशोक बिनायक और सूर्य बिनायक मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यहां भक्तजन भगवान गणेश की पूजा में शामिल हुए और उन्हें पुष्प, फल और मिठाइयों की भेंट दी। सौभाग्य, ज्ञान एवं समृद्धि की कामना की। गणेश चतुर्थी का यह पर्व स्थानीय लोगों के जीवन में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक समरसता की झलक पेश करता है।

नेपाल के सभी शहरों में उमड़ा भक्तों का हुजूम

इस अवसर पर सिर्फ काठमांडू ही नहीं, बल्कि नेपाल के अन्य शहरों और कस्बों के गणेश मंदिरों में भी भक्तों की संख्या बड़ी रही। हर जगह श्रद्धालु भक्ति भाव से भगवान गणेश की आराधना करते नजर आए। भगवान गणेश की पूजा के साथ ही धार्मिक गीत गाए गए और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर तान ने त्योहार को और भी खास बना दिया।

नेपाल के नेवार समुदाय, जो हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के अनुयायी हैं, ने इस दिन विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम और भोज का आयोजन किया। इस भोज में पीसा हुआ चावल, काली दाल, सेम, अदरक और लहसुन से बने व्यंजन परोसे गए।

इस प्रसाद को सबसे पहले भगवान गणेश को अर्पित किया गया, इसके बाद यह भक्तों में वितरण किया गया। भोज के दौरान लोगों ने मिल-जुलकर त्योहार की खुशियां मनाईं और एक-दूसरे के प्रति सद्भाव और प्रेम का संदेश फैलाया।

एकजुटता का पर्व है गणेश चतुर्थी

नेपाल में न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल का भी पर्व है। यह त्योहार समुदाय के बीच एकता और सौहार्द्र बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। मंदिरों के सजावट और पूजा-अर्चना की विधि से स्पष्ट होता है कि भक्तगण इस दिन को कितनी श्रद्धा और भक्ति से मनाते हैं। साथ ही, यह पर्व लोगों के मन में सकारात्मक ऊर्जा और आशा का संचार करता है।

गणेश चतुर्थी का इतिहास क्या है?

गणेश चतुर्थी की उत्पत्ति प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र भगवान गणेश के जन्म का वर्णन करती है। पारंपरिक रूप से भाद्रपद माह (अगस्त-सितंबर) में मनाया जाने वाला यह त्योहार अज्ञानता और बुराई पर ज्ञान और अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

महाराष्ट्र में क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?

यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र व कर्नाटका में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है।

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