इलाज में लापरवाही के आरोप
ढाका: बांग्लादेश(Bangladesh) की पाबना जिला जेल में बंद प्रसिद्ध हिंदू गायक और अवामी लीग(Awami League) के नेता प्रोलय चाकी की रविवार रात (11 जनवरी 2026) राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई। प्रोलय चाकी के परिवार, विशेषकर उनके बेटे सानी चाकी ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का सीधा आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि प्रोलय पहले से ही हृदय रोग, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों(Serious illnesses) से जूझ रहे थे, लेकिन जेल में उन्हें समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और उचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई, जिससे उनकी हालत बिगड़ती गई।
प्रशासन का पक्ष और गिरफ्तारी का कारण
जेल अधीक्षक मोहम्मद ओमर फारुक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रोलय चाकी को दिल का दौरा पड़ने के तुरंत बाद अस्पताल भेजा गया था। गौरतलब है कि प्रोलय चाकी अवामी लीग के जिला स्तरीय सांस्कृतिक सचिव थे और उन्हें 16 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। बांग्लादेश में अवामी लीग पर वर्तमान प्रतिबंधों(Bangladesh) के चलते उनसे जुड़े नेताओं की गिरफ्तारियां बढ़ गई हैं। प्रशासन का दावा है कि उनकी मौत प्राकृतिक कारणों (बीमारी) से हुई है, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ता इस घटना को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं।
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बांग्लादेश की जेलों में बढ़ती मौतों का आंकड़ा
मानवाधिकार संगठन ‘ऐन ओ सलीश केंद्र’ के आंकड़े बांग्लादेश की जेलों की भयावह स्थिति को दर्शाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में जेलों में कुल 107 लोगों की मौत हुई, जो 2024 की तुलना में (65 मौतें) काफी अधिक है। इनमें से 69 लोग ऐसे थे जिन पर(Bangladesh) अभी मुकदमा चल रहा था। प्रोलय चाकी की मौत ने न केवल जेल व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि वहां रह रहे हिंदू अल्पसंख्यकों और राजनीतिक विरोधियों की सुरक्षा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है।
प्रोलय चाकी कौन थे और उन्हें कब गिरफ्तार किया गया था?
प्रोलय चाकी बांग्लादेश(Bangladesh) के एक लोकप्रिय हिंदू गायक और अवामी लीग के जिला सांस्कृतिक सचिव थे। उन्हें 16 दिसंबर 2025 को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी का मुख्य कारण प्रतिबंधित पार्टी ‘अवामी लीग’ से उनका जुड़ाव माना जा रहा है।
परिवार ने अस्पताल की सुविधाओं को लेकर क्या सवाल उठाए हैं?
प्रोलय के बेटे सानी चाकी का आरोप है कि जब उनके पिता को पहले पाबना जनरल अस्पताल ले जाया गया, तो वहां हृदय रोग के इलाज की बुनियादी सुविधाएं तक मौजूद नहीं थीं। इसके बावजूद उन्हें काफी समय तक वहीं रखा गया और राजशाही रेफर करने में देरी की गई, जिससे इलाज के कीमती घंटे बर्बाद हो गए।
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