तारिक रहमान और नाहिद इस्लाम के बीच वार-पलटवार
ढाका: छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे और एनसीपी (NCP) नेता नाहिद इस्लाम(Bangladesh) ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नाहिद का दावा है कि बीएनपी (BNP) की चुनावी जीत के पीछे अवामी लीग और भारत के साथ एक गुप्त समझौता था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी समझौते के तहत शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को फिर से सक्रिय होने की अनुमति दी जा रही है और कई जिलों में उनके दफ्तर दोबारा खुल रहे हैं। नाहिद ने चेतावनी दी है कि यदि अवामी लीग को फिर से स्थापित करने की कोशिश हुई, तो वे कड़ा ‘राजनीतिक प्रतिरोध’ करेंगे।
कैबिनेट चयन और भ्रष्टाचार पर तीखे सवाल
नाहिद इस्लाम ने तारिक रहमान की नई कैबिनेट की संरचना पर भी कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने युवाओं को नजरअंदाज(Bangladesh) किया है और ऐसे लोगों को मंत्री बनाया है जो बैंक धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और हत्या जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। नाहिद ने सवाल उठाया कि जो लोग खुद बड़े ‘लोन डिफॉल्टर’ हैं, वे भ्रष्टाचार मुक्त देश कैसे बना पाएंगे। उन्होंने सरकार को ‘जनता के साथ धोखा’ करने वाला करार दिया है।
अन्य पढ़े: टेक्सास में हनुमान प्रतिमा पर विवाद
संवैधानिक सुधारों पर गतिरोध और आंदोलन की धमकी
विवाद का एक अन्य बड़ा कारण ‘कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म काउंसिल’ की शपथ न लेना भी है। नाहिद ने बीएनपी पर आरोप लगाया कि वे संसद(Bangladesh) को सुचारू रूप से चलाने और जरूरी संवैधानिक सुधारों को लागू करने में देरी कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि संसद का सत्र तुरंत बुलाया जाए। शेख हसीना को सत्ता से हटाने में अहम भूमिका निभाने वाले नाहिद अब तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की धमकी दे रहे हैं, जिससे बांग्लादेश में अस्थिरता का खतरा फिर से बढ़ गया है।
नाहिद इस्लाम कौन हैं और वे तारिक रहमान का विरोध क्यों कर रहे हैं?
नाहिद इस्लाम 2024 के उस छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता थे जिसने शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका था। वे मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में सलाहकार भी रहे। उनका विरोध मुख्य रूप से अवामी लीग की वापसी की आशंका और तारिक रहमान की कैबिनेट में शामिल दागी मंत्रियों को लेकर है।
तारिक रहमान सरकार पर ‘भारत कनेक्शन’ का आरोप क्यों लग रहा है?
नाहिद इस्लाम का आरोप है कि बीएनपी ने सत्ता पाने के लिए भारत और अवामी लीग के साथ समझौता किया है। उनका तर्क है कि शेख हसीना की पार्टी के दफ्तरों का दोबारा खुलना इस बात का सबूत है कि सरकार ने उन्हें अंदरूनी तौर पर हरी झंडी दे दी है।
अन्य पढ़े: