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Bay of Bengal: बंगाल की खाड़ी में बड़ी रणनीतिक हलचल

Author Icon By Dhanarekha
Updated: May 23, 2026 • 4:21 PM
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बांग्लादेश के दो पोर्ट इस्तेमाल करेगा अमेरिका, खुफिया जानकारी साझा करने पर भी हुआ समझौता

ढाका: बांग्लादेश और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने(Bay of Bengal) के लिए तीन बड़े समझौते हुए हैं। इस नए करार के तहत बांग्लादेश ने अमेरिका(America) को अपने दो सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों—चिटगांव और मतारबाड़ी के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है, जहाँ अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत और सैन्य जहाज आ-जा सकेंगे। इसके साथ ही, दोनों देशों ने सैन्य और सुरक्षा से जुड़ी गुप्त खुफिया जानकारियां साझा करने तथा बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री निगरानी बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इन समझौतों के बाद इस पूरे समुद्री क्षेत्र में अमेरिका का प्रभाव और मौजूदगी काफी बढ़ जाएगी

चीन की घेराबंदी और ‘मलक्का डिलेमा’ पर अमेरिका की नजर

अमेरिका के इस कदम का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग ‘मलक्का स्ट्रेट’ (Malacca Strait) के आसपास अपनी पकड़ मजबूत करना और चीन की गतिविधियों पर नजर रखना है। वैश्विक व्यापार का लगभग 60% हिस्सा इसी रास्ते से होता है। यह जलडमरूमध्य चीन की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी है, क्योंकि चीन का करीब 80% तेल आयात इसी मार्ग से गुजरता है। इस भारी निर्भरता के कारण ही चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे ‘मलक्का डिलेमा’ (Malacca Dilemma) कहा था। इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की पहुंच चीन के लिए एक बड़ा सुरक्षा संकट खड़ी कर सकती है।

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भारत की स्थिति और क्षेत्रीय संप्रभुता के समीकरण

यह घटनाक्रम भारत के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि चिटगांव बंदरगाह भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से सिर्फ 1100 किलोमीटर दूर है। मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए भी व्यापारिक रूप से बेहद खास है, क्योंकि देश का 55% व्यापार इसी रास्ते से होता है। भारत का ‘INS बाज’ एयर स्टेशन इस पूरे इलाके की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव बढ़ने से भारत-अमेरिका सहयोग को नई दिशा मिल सकती है, हालांकि इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे पड़ोसी देश अपनी समुद्री संप्रभुता को लेकर काफी संवेदनशील हैं, जिससे इस क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा।

चीन के संदर्भ में ‘मलक्का डिलेमा’ क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 80% तेल का आयात मलक्का स्ट्रेट के रास्ते से ही करता है। यदि किसी युद्ध या तनाव की स्थिति में विरोधियों द्वारा इस पतले समुद्री मार्ग को ब्लॉक (नाकाबंदी) कर दिया जाए, तो चीन की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है। चीन की इसी रणनीतिक कमजोरी और अत्यधिक निर्भरता को उसके पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ ने ‘मलक्का डिलेमा’ का नाम दिया था।

भारत के लिए मलक्का स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति क्यों फायदेमंद है और भारत यहाँ कैसे निगरानी रखता है?

भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह मलक्का स्ट्रेट के ठीक पश्चिमी मुहाने के पास स्थित है, जो भारत को एक मजबूत भौगोलिक और रणनीतिक बढ़त देता है। भारत यहाँ कैंपबेल बे (Campbell Bay) में स्थित अपने सैन्य एयर स्टेशन ‘INS बाज’ (INS Baaz) के जरिए चौबीसों घंटे पूरे समुद्री ट्रैफिक और विदेशी जहाजों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखता है।

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