अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और वहां की न्यायपालिका के बीच का टकराव अब एक गंभीर संवैधानिक संकट से बढ़कर वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का रूप लेता जा रहा है। ट्रंप का यह आक्रामक रुख दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के विरोध में देखा जा रहा है, जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के तहत एकतरफा टैरिफ लगाने के अधिकार को असंवैधानिक करार दिया था। शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए घोषणा की कि वह वैश्विक स्तर पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क (Import Tarrif) को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करेंगे। यह घोषणा शुक्रवार को लिए गए उनके पिछले फैसले के महज 24 घंटे के भीतर आई है, जो दर्शाता है कि व्हाइट हाउस और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के बीच ठन गई है।
6-3 बहुमत से सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह व्यवस्था दी थी कि 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को यह अधिकार नहीं देता कि वे बिना विधायी मंजूरी के व्यापारिक शुल्क थोप सकें। इस न्यायिक आदेश का सीधा अर्थ यह था कि भारत सहित कई देशों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्कों को वापस लेकर पुराने स्तर (लगभग 3.5%) पर लाना होगा। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले को हास्यास्पद और अमेरिका विरोधी बताते हुए सोशल मीडिया (Social Media) पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उन जजों की जमकर आलोचना की जिन्होंने उनके खिलाफ मतदान किया, जबकि अपने पक्ष में रहने वाले तीन जजों—ब्रेट कवाना, क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलिटो—की सराहना की।
शुक्रवार रात एक कार्यकारी आदेश के जरिए उन्होंने कांग्रेस को दरकिनार करते हुए पहले 10 प्रतिशत और अब उसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया है।
🇮🇳 भारत पर क्या होगा असर?
भारत के परिप्रेक्ष्य में यह स्थिति अनिश्चितता और आंशिक राहत के बीच फंसी नजर आती है। पिछले वर्ष रूस से तेल आयात करने के कारण भारत को अमेरिका से 50 प्रतिशत तक के भारी टैरिफ का सामना करना पड़ा था। हालांकि, फरवरी 2026 में एक अंतरिम व्यापार समझौते के बाद राहत मिली थी और ट्रंप ने भारत के लिए इन शुल्कों को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूर्णतः लागू होता, तो भारत पर लगने वाला शुल्क गिरकर महज 3.5 प्रतिशत रह जाता, जो भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा वरदान साबित होता। लेकिन ट्रंप के नए 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ के लागू होने के बाद, भारत के लिए प्रभावी दर अब 18.5 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है। इसका अर्थ है कि इस महीने की शुरुआत में तय हुई 18 प्रतिशत की दर के मुकाबले भारत पर केवल 0.5 प्रतिशत का मामूली अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो शुरुआती अनुमानों के मुकाबले कम नुकसानदेह है।
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150 दिन की समयसीमा और आगे की चुनौती
फिलहाल ट्रंप द्वारा लगाए गए ये नए टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए वैध हैं। इस समय सीमा के बाद, यदि ट्रंप प्रशासन इन शुल्कों को जारी रखना चाहता है, तो उसे अमेरिकी कांग्रेस से विधिवत कानून पारित कराना होगा, जो उनके लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे उन देशों के साथ व्यापारिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेंगे जिनके साथ अमेरिका के द्विपक्षीय समझौते हैं। हालांकि, वैश्विक बाजार इस समय राष्ट्रपति और न्यायपालिका के बीच की इस रस्साकशी को बेहद करीब से देख रहा है, क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में पैदा हुआ यह आंतरिक गतिरोध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति को सीधे तौर पर प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
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