खुशियों पर भारी पड़ा तनाव
तेल अवीव/तेहरान: 60 साल में पहली बार इजराइल ने सुरक्षा कारणों और बैलिस्टिक मिसाइल(Eid) हमलों के खतरे को देखते हुए यरुशलम की ऐतिहासिक अल-अक्सा मस्जिद को ईद की नमाज के लिए बंद कर दिया। 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब इस्लाम के इस तीसरे सबसे पवित्र स्थल पर ऐसी पाबंदी लगी है। मस्जिद(Mosque) के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है और ओल्ड सिटी में केवल स्थानीय निवासियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है, जिससे नमाजियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आई हैं।
ईरान और खाड़ी देशों में सादगी से मनाया गया त्योहार
ईरान में ईद का त्योहार गमगीन माहौल में मनाया गया, जहाँ लोगों ने अमेरिकी-इजराइली(Eid) हमलों में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित की। तेहरान के बाजारों में रौनक गायब रही और जश्न की जगह प्रार्थनाओं ने ले ली। वहीं, UAE, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में सुरक्षा के मद्देनजर खुले मैदानों (ईदगाहों) में सामूहिक नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी गई। जंग की वजह से इन देशों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कर दी गई है।
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वैश्विक प्रभाव: कहीं सीजफायर तो कहीं रिकॉर्ड भीड़
युद्ध के बीच एक राहत भरी खबर पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा से आई, जहाँ सऊदी अरब और तुर्किये की अपील पर 5 दिनों के अस्थायी सीजफायर की घोषणा(Eid) की गई ताकि लोग शांति से ईद मना सकें। दूसरी ओर, रूस के मॉस्को में करीब 2 लाख और सेंट पीटर्सबर्ग में 1 लाख से ज्यादा मुसलमान नमाज के लिए जुटे। ब्रिटेन और तुर्किये में भी बड़ी संख्या में लोगों ने सामूहिक नमाज अदा की, जबकि गाजा और लेबनान में लोग तबाही और शरणार्थी शिविरों के बीच सादगी से त्योहार मनाने को मजबूर दिखे।
अल-अक्सा मस्जिद को ईद पर बंद करने का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
अल-अक्सा मस्जिद को 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार इस साल ईद की नमाज के लिए पूरी तरह बंद किया गया है। यह फैसला मिसाइल हमलों के मलबे गिरने और सुरक्षा कारणों से लिया गया है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध में सीजफायर की घोषणा क्यों की गई?
सऊदी अरब, तुर्किये और कतर जैसे देशों की अपील पर दोनों देशों ने ईद के मौके पर 18 मार्च से 24 मार्च तक 5 दिनों के लिए युद्ध रोकने (सीजफायर) का फैसला किया है ताकि लोग शांति से त्योहार मना सकें।
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