USA- ईरान युद्ध बजट पर बवाल, ट्रंप की 200 अरब डॉलर योजना पर संसद में घमासान

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वॉशिंगटन । ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और उसके वैश्विक असर ने अमेरिकी राजनीति (American Politics) में नई हलचल पैदा कर दी है। व्हाइट हाउस द्वारा युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से अधिक के अतिरिक्त बजट प्रस्ताव ने United States Congress में तीखी बहस छेड़ दी है। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों के नेता आमने-सामने आ गए हैं।

ट्रंप का तर्क: सेना को मजबूत रखना जरूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) ने इस भारी बजट की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सेना को अपनी सर्वोच्च क्षमता बनाए रखने के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है। उनके मुताबिक, वैश्विक नेतृत्व बनाए रखने के लिए यह एक जरूरी निवेश है।

अपनी ही पार्टी में विरोध के स्वर तेज

हालांकि, ट्रंप की इस नीति को उनकी ही पार्टी के कुछ नेताओं का विरोध झेलना पड़ रहा है। रिपब्लिकन सांसद (Lauren Boebert) और Chip Roy ने स्पष्ट किया है कि वे किसी लंबे और अनिश्चित युद्ध के लिए करदाताओं का पैसा खर्च करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि जब देश के भीतर आर्थिक चुनौतियां हैं, तब विदेशी युद्धों पर इतना बड़ा खर्च करना उचित नहीं है।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधि

खाड़ी क्षेत्र में स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिकी सेना ने Strait of Hormuz के आसपास अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। जनरल डैन केन के अनुसार, ए-10 वारथॉग विमान और अपाचे हेलीकॉप्टरों के जरिए ईरानी नौसैनिक ठिकानों और तेज गति वाली नौकाओं को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि अहम समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखा जा सके।

तेल बाजार में उथल-पुथल, वैश्विक असर

सैन्य तनाव और हमलों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। इससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

डेमोक्रेट्स की मांग: स्पष्ट हो युद्ध का लक्ष्य

विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं और वित्तीय विशेषज्ञों ने प्रशासन से युद्ध की स्पष्ट रणनीति और लक्ष्य बताने की मांग की है। उनका कहना है कि 200 अरब डॉलर का यह बजट आगे चलकर कहीं एक ट्रिलियन डॉलर तक न पहुंच जाए। सीनेट में बहुमत के नेता John Thune ने भी इस बजट के पारित होने को लेकर अनिश्चितता जताई है।

ईरानी तेल प्रतिबंधों में ढील पर चर्चा

इस बीच प्रशासन के भीतर ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि तेल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है, जो युद्ध के दौरान अमेरिका के लिए चुनौती बन सकता है।

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युद्ध की लागत और नैतिकता पर जारी बहस

फिलहाल वॉशिंगटन में इस युद्ध की लागत, रणनीति और नैतिकता को लेकर बहस थमने का नाम नहीं ले रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।

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Anuj Kumar

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Anuj Kumar

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