జైశంకర్, రూబియో భేటీ..ట్రేడ్​ డీల్​పై హర్షం ఫెడ్ ఛైర్మన్‌గా కెవిన్ వార్ష్.. గ్లోబల్ మార్కెట్లలో ప్రకంపనలు H-1B వీసా షాక్, లక్ష డాలర్ల ఫీజు ఘోర విమాన ప్రమాదం..15 దుర్మరణం కొత్త H-1B వీసా దరఖాస్తులను నిలిపివేసిన టెక్సాస్ 16 వేల మంది ఉద్యోగులకు లేఆప్స్ USలో మంచు తుఫాన్.. 29 మంది మృతి పెళ్లి వేడుకలో ఆత్మాహుతి దాడి ఇరాన్ వైపు భారీగా యుద్ధ నౌకలు చంద్రుడిపై హోటల్ ‘ఎప్‌స్టీన్’ ప్రకంపనలు ట్రంప్‌కు విజ్ఞప్తి చేసి యువకుడి ఆత్మహత్య జైశంకర్, రూబియో భేటీ..ట్రేడ్​ డీల్​పై హర్షం ఫెడ్ ఛైర్మన్‌గా కెవిన్ వార్ష్.. గ్లోబల్ మార్కెట్లలో ప్రకంపనలు H-1B వీసా షాక్, లక్ష డాలర్ల ఫీజు ఘోర విమాన ప్రమాదం..15 దుర్మరణం కొత్త H-1B వీసా దరఖాస్తులను నిలిపివేసిన టెక్సాస్ 16 వేల మంది ఉద్యోగులకు లేఆప్స్ USలో మంచు తుఫాన్.. 29 మంది మృతి పెళ్లి వేడుకలో ఆత్మాహుతి దాడి ఇరాన్ వైపు భారీగా యుద్ధ నౌకలు చంద్రుడిపై హోటల్ ‘ఎప్‌స్టీన్’ ప్రకంపనలు ట్రంప్‌కు విజ్ఞప్తి చేసి యువకుడి ఆత్మహత్య

USA- एआई सिस्टम के उपयोग पर सरकार का नियंत्रण, वैध इस्तेमाल के लिए अनुमति जरूरी

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: March 8, 2026 • 12:14 PM
వాట్సాప్‌లో ఫాలో అవండి

वाशिंगटन,। अमेरिका में (Donald Trump ) प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनियों के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इन नियमों के तहत जो कंपनियां अमेरिकी सरकार के साथ काम करना चाहेंगी, उन्हें अपने एआई सिस्टम के किसी भी वैध उपयोग के लिए अमेरिकी सरकार को स्थायी लाइसेंस देना होगा। इस कदम का उद्देश्य सरकारी एजेंसियों द्वारा एआई तकनीक के इस्तेमाल को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है।

सरकारी अनुबंधों के लिए बनाए गए नए नियम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये नए दिशा-निर्देश (General Services Administration) (जीएसए) द्वारा तैयार किए गए हैं और यह मुख्य रूप से नागरिक (सिविलियन) सरकारी अनुबंधों पर लागू होंगे। जीएसए अमेरिका की वह प्रमुख एजेंसी है जो सरकारी खरीद और तकनीकी सेवाओं के मानकों को निर्धारित करती है।

इन नियमों के तहत एआई कंपनियों को सरकार के साथ अनुबंध करने से पहले यह स्पष्ट करना होगा कि उनके एआई मॉडल किन परिस्थितियों में और किस प्रकार उपयोग किए जा सकते हैं। साथ ही सरकार को उन तकनीकों का स्थायी लाइसेंस देना होगा, जिससे सरकारी संस्थाएं भविष्य में भी इन प्रणालियों का उपयोग जारी रख सकें।

एआई कंपनियों पर पारदर्शिता की नई शर्तें

नए दिशानिर्देशों के तहत एआई कंपनियों को अपने मॉडल के काम करने के तरीके, डेटा स्रोतों और संभावित जोखिमों के बारे में अधिक पारदर्शिता दिखानी होगी। कंपनियों को यह भी बताना होगा कि क्या उनके एआई सिस्टम में किसी प्रकार का राजनीतिक या वैचारिक झुकाव जानबूझकर जोड़ा गया है। इसके अलावा कंपनियों को यह जानकारी भी देनी होगी कि उनके एआई मॉडल को किसी विदेशी सरकार या गैर-अमेरिकी नियमों के अनुरूप संशोधित किया गया है या नहीं। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकेगा।

पेंटागन और एंथ्रोपिक विवाद के बाद बढ़ी सख्ती

यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी रक्षा विभाग यानी (United States Department of Defense) और एआई कंपनी Anthropic के बीच हाल ही में तनाव बढ़ गया था। पेंटागन ने एंथ्रोपिक को सप्लाई-चेन जोखिम घोषित करते हुए सरकारी ठेकेदारों को सैन्य कार्यों में उसकी तकनीक के उपयोग से रोक दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद के बाद अमेरिकी सरकार एआई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर अधिक सतर्क हो गई है। यही कारण है कि नए नियमों में राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी पारदर्शिता और सरकारी नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया है।

अन्य पढ़े:  एक कैच से बदला मैच अक्षर पटेल से भारत की जीत

एआई उद्योग पर पड़ सकता है व्यापक असर

विश्लेषकों के अनुसार इन नियमों का असर केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि वैश्विक एआई उद्योग पर भी पड़ सकता है। जो कंपनियां अमेरिकी सरकार के साथ काम करना चाहती हैं, उन्हें अपने एआई मॉडल के उपयोग, लाइसेंस और संचालन के नियमों में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। इसके साथ ही यह कदम एआई तकनीक के विकास और उपयोग को अधिक जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक सख्त नियमों से नवाचार की गति भी प्रभावित हो सकती है।

Read More :

#AI news #America Government News #Breaking News in Hindi #Defense News #Donald Trump news #General Services AdministrationNews #Hindi News #Latest news #USA news

గమనిక: ఈ వెబ్ సైట్ లో ప్రచురించబడిన వార్తలు పాఠకుల సమాచార ప్రయోజనాల కోసం ఉద్దేశించి మాత్రమే ఇస్తున్నాం. మావంతుగా యధార్థమైన సమాచారాన్ని ఇచ్చేందుకు కృషి చేస్తాము.