तनाव की वजह: चांसलर मर्ज का बयान और ट्रम्प की नाराजगी
वाशिंगटन: अमेरिका और जर्मनी के बीच संबंधों में उस समय खटास(Trump) आ गई जब जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ईरान मुद्दे पर अमेरिका की आलोचना की। मर्ज ने कहा कि अमेरिका(America) के पास ईरान जंग से बाहर निकलने की कोई ठोस योजना नहीं है, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपमानित होना पड़ा है। इस बयान से नाराज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जर्मनी से अपने करीब 5,000 सैनिक वापस बुलाने का आदेश दे दिया है। ट्रम्प ने चांसलर मर्ज की समझ पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘हकीकत से दूर’ बताया। यह सैन्य कटौती अगले 6 से 12 महीनों में पूरी की जाएगी।
यूरोप में अमेरिकी सैन्य शक्ति: जर्मनी है सबसे बड़ा केंद्र
दिसंबर 2025 तक जर्मनी में 36,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात थे, जो जापान के बाद दुनिया में अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी सैन्य मौजूदगी है। इसके अलावा इटली(Italy) में 12,000 और ब्रिटेन में 10,000 सैनिक मौजूद हैं। जर्मनी में स्थित रामस्टीन एयर बेस अमेरिकी वायुसेना का मुख्य केंद्र है। ट्रम्प का मानना है कि यूरोपीय देश (विशेषकर जर्मनी, इटली और स्पेन) केवल ‘कागजी शेर’ हैं जो जरूरत पड़ने पर अमेरिका का साथ नहीं देते। अब ट्रम्प की योजना इन सैनिकों को यूरोप से हटाकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तैनात करने की है ताकि चीन की बढ़ती चुनौतियों का सामना किया जा सके।
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ऐतिहासिक संदर्भ: कब्ज़े से लेकर सुरक्षा दीवार तक
जर्मनी में अमेरिकी सेना की मौजूदगी 1945 में नाजी जर्मनी की हार के बाद शुरू हुई थी। शीत युद्ध (Cold War) के दौरान ये सैन्य ठिकाने सोवियत संघ के खिलाफ एक रक्षा दीवार बन गए। 1949 में नाटो (NATO) के गठन के बाद ये ठिकाने स्थायी हो गए। हालांकि 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद सैनिकों की संख्या कम की गई, लेकिन जर्मनी आज भी अमेरिका के लिए एक ‘लॉन्चिंग पैड’ की तरह है। यहाँ से अमेरिका इराक, अफगानिस्तान और अफ्रीका में अपने सैन्य ऑपरेशनों को कंट्रोल करता है। ट्रम्प द्वारा सैनिकों को हटाना नाटो के भीतर बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है।
जर्मनी में अमेरिका के कितने सैनिक तैनात हैं और वहां ‘रामस्टीन एयर बेस’ का क्या महत्व है?
वर्तमान में जर्मनी में लगभग 36,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। रामस्टीन एयर बेस यूरोप में अमेरिकी वायुसेना का मुख्य केंद्र है, जहाँ से पूरे यूरोप और मध्य-पूर्व (Middle-East) के सैन्य ऑपरेशनों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया जाता है।
डोनाल्ड ट्रम्प यूरोपीय देशों को ‘कागजी शेर’ क्यों कह रहे हैं?
ट्रम्प का मानना है कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं लेकिन जब अमेरिका को ईरान या अन्य मोर्चों पर सैन्य समर्थन की जरूरत होती है, तो ये देश पीछे हट जाते हैं। साथ ही, कई देश नाटो के तय 2% रक्षा खर्च के लक्ष्य को भी पूरा नहीं कर रहे हैं।
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