H1B visa : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति के बीच H-1B वीज़ा को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इलिनॉय से डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने एक बार फिर HIRE Act को अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया है।
इस प्रस्तावित कानून के तहत H-1B वीज़ा की सालाना सीमा 65,000 से बढ़ाकर 1,30,000 करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य वैश्विक प्रतिभाओं को अमेरिका में अवसर देना और साथ ही घरेलू रोजगार को मजबूत करना है।
इस बिल को ITServe Alliance समेत कई तकनीकी संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ है।
राजा कृष्णमूर्ति ने कहा,
“भविष्य की नौकरियों और उद्योगों के लिए अमेरिका को इनोवेशन में आगे रहना होगा। इसके लिए अपने workforce को मजबूत करने के साथ-साथ दुनिया की बेहतरीन प्रतिभाओं का स्वागत जरूरी है।”
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HIRE Act के तहत स्कूल स्तर पर STEM शिक्षा को बढ़ावा देने और कंपनियों को कुशल पेशेवरों की भर्ती में मदद करने की भी योजना है।
वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी क़ैरोलाइन लेविट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप अमेरिकी कर्मचारियों को विदेशी कर्मचारियों से बदलने के पक्ष में नहीं हैं और वे अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा को (H1B visa) प्राथमिकता देते हैं।
गौरतलब है कि 19 सितंबर को ट्रंप ने H-1B वीज़ा पर $100,000 (करीब ₹88 लाख) का एकमुश्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी। बाद में USCIS ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क स्टेटस बदलने या वीज़ा बढ़ाने वाले आवेदनों पर लागू नहीं होगा।
इसके अलावा, अमेरिकी श्रम विभाग ने Project Firewall शुरू किया है, जिसके तहत H-1B वीज़ा से जुड़े संभावित दुरुपयोग की जांच की जा रही है।
USCIS के अनुसार, हाल के वर्षों में मंजूर हुए H-1B वीज़ा में से लगभग 71% भारतीय नागरिकों को मिले हैं।
हाल ही में सऊदी निवेश सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि कुछ खास मामलों में विदेशी विशेषज्ञों को अमेरिकी कामगारों को तकनीकी प्रशिक्षण देने की अनुमति दी जा सकती है।
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