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CHINA- भारत-चीन रिश्तों में नरमी, ठेकों पर बड़ा फैसला संभव

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: January 10, 2026 • 11:39 AM
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नई दिल्ली,। दुनिया एक बार फिर हिंदी-चीनी भाई-भाई की झलक देख सकती है। सीमा पर तनाव कम होते ही भारत और चीन के रिश्तों में जमी बर्फ अब पिघलने लगी है। दोनों देशों के बीच दोस्ती की नई शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका के ट्रंप टैरिफ (Trump tarrif) के बीच भारत-चीन संबंधों में सुधार की कोशिशें तेज हो गई हैं।

वित्त मंत्रालय बना रहा है नई रणनीति

इसी कड़ी में अब चीनी कंपनियों के लिए भारत (India) में सरकारी ठेकों के दरवाजे खुल सकते हैं। भारत सरकार का वित्त मंत्रालय इस दिशा में एक नई योजना पर काम कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट (Media Report) के मुताबिक, वित्त मंत्रालय सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर लगी पांच साल पुरानी पाबंदियों को खत्म करने की तैयारी में है।

सीमा पर शांति, कारोबार पर फोकस

माना जा रहा है कि सीमा पर तनाव कम होने के बाद भारत कमर्शियल संबंधों को फिर से मजबूत करना चाहता है। इससे चीनी कंपनियों को भारत के सरकारी ठेकों में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता है। दो सरकारी सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के संबंध बेहतर होने से व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी।

2020 के बाद लगाए गए थे सख्त प्रतिबंध

गौरतलब है कि चीनी कंपनियों पर यह प्रतिबंध वर्ष 2020 में लगाए गए थे, जब गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। उस समय दोनों ओर के कई सैनिक शहीद हुए थे। इसके बाद चीनी कंपनियों के लिए सरकारी ठेकों में हिस्सा लेना लगभग असंभव हो गया था।

रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा मंजूरी बनी बाधा

पहले चीनी कंपनियों को सरकारी ठेकों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था और साथ ही राजनीतिक व सुरक्षा मंजूरी भी लेनी होती थी। इन शर्तों के कारण चीनी कंपनियां भारतीय सरकारी कॉन्ट्रैक्ट की दौड़ से बाहर हो गई थीं।

प्रतिबंधों से भारत को हुआ नुकसान!

सूत्रों का कहना है कि इन प्रतिबंधों का असर भारत पर भी पड़ा। कई सरकारी परियोजनाओं में देरी और संसाधनों की कमी सामने आई। उदाहरण के तौर पर, 2020 के बाद चीन की सरकारी कंपनी सीआरआरसी को 216 मिलियन डॉलर के ट्रेन प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया गया था। अन्य विभागों ने भी प्रतिबंध हटाने की मांग की है ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

अमेरिकी टैरिफ भी बना वजह

सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव अमेरिकी टैरिफ नीति से भी जुड़ा है। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिससे भारत को आर्थिक नुकसान हुआ। साथ ही ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान से भी संबंध सुधारे, जिससे भारत की रणनीति में बदलाव आया।

मोदी का चीन दौरा और रिश्तों में नई पहल

इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल बाद चीन का दौरा किया। दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को गहरा करने पर सहमति जताई। इसके बाद सीधी उड़ानें शुरू हुईं और चीनी पेशेवरों के लिए बिजनेस वीजा प्रक्रिया भी आसान की गई।

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FDI पर प्रतिबंध अभी रहेंगे बरकरार

हालांकि, राहत के बावजूद चीनी कंपनियों से जुड़े विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) पर लगे प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि इस पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) लेगा। फिलहाल वित्त मंत्रालय और पीएमओ ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

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