नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमले जारी रहे तो वह वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित करने वाले कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। ईरान ने संकेत दिया है कि वह (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण कड़ा कर सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
IEA ने जताई वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका
मौजूदा हालात को लेकर International Energy Agency (IEA) ने भी चिंता जताई है। एजेंसी ने कहा कि यदि मध्य पूर्व में युद्ध लंबा खिंचता है तो यह तेल उद्योग के इतिहास में आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बन सकता है।हालांकि इन चेतावनियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ईरान के दुष्ट साम्राज्य को हराना कच्चे तेल की कीमतों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।”
समुद्री माइंस बिछाने के दावे
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि ईरान ने इस जलमार्ग में समुद्री माइंस बिछाने की तैयारी शुरू कर दी है। ईरान की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि जरूरत पड़ने पर इस रास्ते से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहेंगे, तब तक इस मार्ग से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित की जा सकती है।
दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम मार्ग
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, जबकि दुनिया की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा भी इसी मार्ग से भेजा जाता है। यह जलडमरूमध्य ईरान के तट के पास स्थित है, इसलिए इसका रणनीतिक महत्व बेहद ज्यादा है।
ईरानी नेतृत्व के सख्त बयान
ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने सोशल मीडिया पर कहा कि युद्ध शुरू करना आसान होता है, लेकिन उसे केवल बयानों या ट्वीट्स से जीता नहीं जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान पीछे हटने वाला नहीं है और विरोधियों को अपने फैसलों पर पछताना पड़ सकता है।वहीं ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के बयान में भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के विकल्प का जिक्र किया गया है।
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इजरायल ने बताया अभियान का उद्देश्य
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल का संयुक्त अभियान ईरान और लेबनान में तेहरान समर्थित संगठन Hezbollah को कमजोर करने के लिए चलाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को पंगु बनाना है और ऐसी परिस्थितियां बनाना है जिससे मौजूदा शासन पर दबाव बढ़ सके। मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों पर गहरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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