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Iran-US: ईरान-अमेरिका टकराव

Dhanarekha
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Iran-US: ईरान-अमेरिका टकराव

UNSC में तीखी बहस और ट्रम्प की ‘एक्शन’ वाली चेतावनी

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने ईरान(Iran-US) को स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प केवल बातों में नहीं, बल्कि कड़े एक्शन(Strict Action) में विश्वास रखते हैं। वाल्ट्ज ने कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रहे दमन को रोकने के लिए अमेरिका के पास ‘सभी विकल्प’ खुले हैं। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को आगाह किया कि अगर नरसंहार नहीं रुका, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रम्प के कड़े रुख के कारण ही ईरान ने हाल ही में 800 लोगों की फांसी की सजा को फिलहाल टाल दिया है

ईरान का पलटवार और रूस का समर्थन

ईरान ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल बताया है। ईरानी(Iran-US) उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने कहा कि ईरान टकराव(Iran Conflict) नहीं चाहता, लेकिन यदि उन पर कोई हमला हुआ, तो वे उसका ‘निर्णायक और कानूनी’ जवाब देंगे। वहीं, रूस ने भी अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन मानवाधिकारों की आड़ में ईरान में तख्तापलट की कोशिश कर रहा है। रूस ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध की आग में धकेल सकती है।

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डिजिटल ब्लैकआउट और मानवाधिकार संकट

ईरान(Iran-US) इस समय अपने इतिहास के सबसे लंबे ‘डिजिटल ब्लैकआउट’ का सामना कर रहा है, जहाँ कनेक्टिविटी महज 1% रह गई है। नेट ब्लॉक के अनुसार, 8 जनवरी से जारी इस इंटरनेट शटडाउन ने 9 करोड़ लोगों को दुनिया से काट दिया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि अब तक 3,428 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और 18,000 से अधिक लोग जेलों में बंद हैं। इसी दमन के विरोध में अमेरिका ने ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के सचिव समेत 18 अधिकारियों और संस्थाओं पर नए कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।

‘डिजिटल ब्लैकआउट’ से प्रदर्शनों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

डिजिटल ब्लैकआउट का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों के बीच आपसी संचार को तोड़ना और दुनिया तक दमन की खबरें पहुंचने से रोकना है। 180 घंटों से अधिक लंबे इस शटडाउन के कारण ईरानी नागरिक न तो सोशल मीडिया का उपयोग(Iran-US) कर पा रहे हैं और न ही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को जमीनी हकीकत बता पा रहे हैं, जिससे सुरक्षा बलों को कार्रवाई करने की ‘गोपनीयता’ मिल जाती है।

अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध क्यों लगाए हैं?

अमेरिका ने ये प्रतिबंध उन अधिकारियों और संस्थाओं पर लगाए हैं जो प्रदर्शनों को कुचलने और क्रूर कार्रवाई की योजना बनाने में शामिल रहे हैं। वित्त मंत्रालय का मानना है कि इन प्रतिबंधों से ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और उन्हें अपने ही नागरिकों के खिलाफ हिंसा करने से रोकने के लिए मजबूर किया जा सकेगा।

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