बेटी के साथ देखी परेड और न्यूक्लियर पावर बढ़ाने का लिया संकल्प
प्योंगयांग: उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग(Kim Jong) उन ने राजधानी प्योंगयांग के किम इल सुंग स्क्वायर में आयोजित एक विशाल मिलिट्री परेड की समीक्षा की। इस दौरान किम ने स्पष्ट किया कि देश की परमाणु क्षमता को बढ़ाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अपनी वर्कर्स पार्टी की इच्छा दोहराते हुए कहा कि न्यूक्लियर हथियारों की संख्या और उन्हें तैनात करने की तकनीक में अभूतपूर्व वृद्धि की जाएगी। हालांकि इस परेड में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे भारी हथियार नहीं दिखे, लेकिन 14,000 सैनिकों का मार्च किम शासन के सख्त इरादों को दर्शाने के लिए काफी था।
दक्षिण कोरिया को तबाही की धमकी और अमेरिका को संदेश
परेड के दौरान किम जोंग उन ने अपने प्रतिद्वंद्वी दक्षिण कोरिया(Kim Jong) को सीधे शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को रत्ती भर भी खतरा महसूस हुआ, तो दक्षिण कोरिया को ‘पूरी तरह तबाह’ कर दिया जाएगा। वहीं, अमेरिका के प्रति उन्होंने मिला-जुला रुख अपनाया। किम ने कहा कि वॉशिंगटन के साथ बातचीत का रास्ता तभी खुल सकता है जब अमेरिका अपनी ‘दुश्मनी वाली नीति’ (Hostile Policy) को पूरी तरह त्याग दे। विशेषज्ञों का मानना है कि किम परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्तों के बिना अमेरिका से बराबरी के स्तर पर बात करना चाहते हैं।
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उत्तराधिकारी की चर्चा और बेटी जू ए की मौजूदगी
इस मिलिट्री परेड में किम जोंग उन की टीनएज बेटी, जू ए(Kim Jong), एक बार फिर उनके साथ खास अंदाज में नजर आईं। किम के साथ उनकी बार-बार की मौजूदगी इन अटकलों को हवा दे रही है कि उन्हें भविष्य के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियां भी जू ए को किम के वारिस के रूप में देख रही हैं। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक पद या टाइटल की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सत्ता के गलियारों में उनकी बढ़ती सक्रियता उत्तर कोरिया की भविष्य की राजनीति की ओर इशारा करती है।
इस बार की परेड पिछली परेडों से किस तरह अलग थी?
परेड की सबसे खास बात यह रही कि इसमें टैंक या इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे भारी हथियारों का प्रदर्शन नहीं किया गया। इसके बजाय, किम ने अपने संबोधन में परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) के विस्तार पर सबसे ज्यादा जोर दिया। यह रणनीति वैश्विक दबाव के बीच अपने इरादे स्पष्ट करने का एक तरीका हो सकती है।
किम जोंग उन ने अमेरिका के सामने बातचीत के लिए क्या शर्त रखी है?
किम ने कहा कि यदि अमेरिका अपनी दुश्मनी वाली नीतियां(Kim Jong) और प्रतिबंधों का दबाव हटा लेता है, तो वे साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। इसका सीधा अर्थ है कि उत्तर कोरिया चाहता है कि अमेरिका उसे एक परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में स्वीकार करे और बिना ‘डीन्यूक्लियराइजेशन’ (परमाणु हथियारों को खत्म करने) की शर्त के बातचीत आगे बढ़ाए।
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